
महाराष्ट्र: पूर्व कमिश्नर के 'लेटर बम' के बाद सियासी बवंडर, दिल्ली में पवार के घर गठबंधन नेताओं की बैठक
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पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ की वसूली के आरोपों के बाद अघाड़ी सरकार में हलचल तेज है. ऐसे में एनसीपी चीफ शरद पवार संग अघाड़ी गठबंधन के नेताओं की बैठक कई मायनों में अहम मानी जा रही है.
महाराष्ट्र में जारी सियासी हलचल के बीच रविवार को दिल्ली में एनसीपी चीफ शरद पवार के आवास पर अघाड़ी गठबंधन के नेताओं की बैठक हो रही है. इस बैठक में कांग्रेस की ओर से कमलनाथ शामिल हुए. इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत ने शरद पवार से मुलाकात की. शरद पवार के आवास पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार मौजूद हैं. इसके अलावा प्रफुल्ल पटेल और जयंत पाटिल सरीखे महाराष्ट्र के बड़े नेता भी इस बैठक में मौजूद हैं. महाराष्ट्र की सियासत को लेकर पवार के आवास पर बड़ी बैठक चल रही है.
अहमदाबाद के घाटलोडिया इलाके में नेशनल स्कूल के बाहर दसवीं के छात्र पर जानलेवा हमला हुआ है. परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद 8 से 10 हमलावरों ने छात्र को घेर लिया और उसे स्कूल से लगभग 50 मीटर दूर तक घसीट कर चाकू, पाइप और लकड़ी से बेरहमी से मारा. इस मामले में स्कूल के चार छात्र और उनके साथी शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि यह हमला पुरानी रंजिश के कारण हुआ है.

जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों की छिपने की जगह का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है. यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तहत किया गया जिसमें आतंकियों को पकड़ने और उन्हें मार गिराने के उद्देश्य से सुरक्षा बल सक्रिय थे. इस अभियान में आतंकियों के छिपने के स्थान का पता चलने से इलाके में सुरक्षा अभी और सख्त हो गई है.

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद के दावे पर नोटिस जारी किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2022 के आदेशों का हवाला दिया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि नोटिस सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है और उन्होंने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

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कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।








