
महाराष्ट्र और झारखंड में चुनावी शंखनाद... हरियाणा की हार से सबक लेकर कमबैक करेगी कांग्रेस या NDA को मिलेगा बूस्टर डोज?
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लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से जहां हर कदम पर शह और मात का खेल चल रहा है, पक्ष और विपक्ष के बीच ठनी रहती है, वहां आज दस्तक देता सवाल है कि क्या हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाने के बाद NDA अब महाराष्ट्र और झारखंड में बूस्टर डोज ले पाएगा? या फिर हरियाणा में मिली हार से सबक लेकर कांग्रेस साथी दलों के साथ दो राज्यों में कमबैक करेगी?
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से जहां हर कदम पर शह और मात का खेल चल रहा है, पक्ष और विपक्ष के बीच ठनी रहती है, वहां आज दस्तक देता सवाल है कि क्या हरियाणा में जीत की हैट्रिक लगाने के बाद NDA अब महाराष्ट्र और झारखंड में बूस्टर डोज ले पाएगा? या फिर हरियाणा में मिली हार से सबक लेकर कांग्रेस साथी दलों के साथ दोनों राज्यों में कमबैक करेगी? महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है. महाराष्ट्र में 20 नवंबर को वोटिंग है. झारखंड में 13 और 20 नवंबर को मतदान होगा. इन दोनों राज्यों के चनाव नतीजे 23 नवंबर को घोषित होंगे.
इस दिन नतीजों का इंतजार उत्तर प्रदेश को भी होगा, क्योंकि यहां विधानसभा की नौ सीटों पर उपचुनावों का भी ऐलान हो चुका है, जिसके लिए 13 नवंबर को मतदान होगा. लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की रिकॉर्डतोड़ जीत के बाद अब बीजेपी उपचुनाव में हिसाब बराबर करना चाहेगी. निगाहें 23 नवंबर को वायनाड पर भी होंगी, जहां से राहुल गांधी के सीट खाली करने के बाद प्रियंका गांधी उपचुनाव में ताल ठोकेंगी. वायनाड में भी 13 नवंबर को वोटिंग है. उत्तर प्रदेश के अलावा 13 और राज्यों में विधानसभा उपचुनाव होने जा रहे हैं. यानी आधे भारत में एक बार फिर से चुनावी माहौल दिखने जा रहा है.
झारखंड में इंडिया ब्लॉक के सामने हैं ज्यादा चुनौतियां
छोटा नागपुर के पठार पर जंगलों से आच्छादित झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होंगे. पहले चरण में 13 नवंबर को 43 सीटों के लिए मतदान होगा, दूसरे चरण में 20 नवंबर को 38 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 42 सीटों का है. 2019 के विधानसभा चुनाव में 30 सीटें जीतकर जेएमएम सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 25 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा. कांग्रेस को 16, झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) को 3, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) को 2, आरजेडी, सीपीआई (एमएल) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को एक-एक सीटें मिली थीं. दो निर्दलीय भी जीते थे. झारखंड में 2019 में एंटी इन्कम्बेंसी बीजेपी सरकार के खिलाफ थी, इस बार हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार के खिलाफ होगी.
वहीं पिछली बार 3 सीटें जीतने वाली झाविमो का इस चुनाव में नाम-निशान नदारद होगा. बाबू लाल मरांडी ने अपनी पार्टी झाविमो का बीजेपी में विलय कर दिया था. बाबू लाल मरांडी फिलहाल झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष भी हैं. कोल्हान रीजन में भी समीकरण बदले हैं, जहां से सीएम रहते रघुवर दास को पिछले चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा था. शिबू सोरेन के खासमखास रहे कोल्हान टाइगर चंपाई सोरेन अब बीजेपी में जा चुके हैं. सोरेन परिवार में भी फूट पड़ चुकी है. हेमंत सोरेन के बड़े भाई दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन अब बीजेपी में हैं. लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी ने इंडिया ब्लॉक के मुकाबले ज्यादा विधानसभा सीटों पर लीड हासिल की थी. उसे 8 सीटें मिली थीं, जबकि झामुमो को 3, कांग्रेस को 2 और बीजेपी की सहयोगी आजसू को 1 सीट पर जीत हासिल हुई थी. इस लिहाज से इंडिया ब्लॉक के लिए इस बार के चुनाव में बीजेपी के मुकाबले ज्यादा चुनौतियां होंगी.
लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में एमवीए पड़ा था भारी

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