
भारत से फ्रस्ट्रेट क्यों हैं ट्रंप, क्यों दे रहे कोरिया-जापान का उदाहरण? न इंडिया टैरिफ पर डिमांड मान रहा, न बातचीत पर पहल
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने एक्शन और बयान दोनों से भारत पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. लेकिन भारत न तो उनके किसी कदम से डरा हुआ है और न ही ट्रंप की शर्तों पर जल्दबाजी में किसी समझौते के लिए राजी हुआ है. ऐसे में ट्रंप की हताशा साफ दिख रही है और यही वजह है कि वह एक के बाद लगातार धमकी भरे बयान दे रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि वह रूस से तेल की खरीदे न करे. लेकिन भारत इसके लिए राजी नहीं है और उसका साफ कहना है कि अपने हितों की रक्षा के लिए रूसी तेल की खरीद जारी रहेगी. ट्रंप प्रशासन संकेत दे रहा है कि अगर भारत मान जाए तो टैरिफ में रियायत मिल सकती है, लेकिन भारत झुकने को तैयार नहीं है. ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप हताश हैं, क्योंकि न तो भारत तेल खरीद रोक रहा है और न ही बातचीत की टेबल पर आने के लिए पहल कर रहा है.
टैरिफ को लेकर ट्रंप का दोहरा रवैया
डोनाल्ड ट्रंप भारत को बातचीत के लिए राजी करने के लिए जापान-दक्षिण कोरिया का उदाहरण दे रहे हैं. ट्रंप प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद भारत मानने को तैयार नहीं है. ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया और इसके बाद 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया है. इस तरह भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया गया है. ट्रंप का दावा है कि भारत की रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को हवा दे रहा है.
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हालांकि भारत ने इन आरोपों को खारिज किया और जंग रोकने में अमेरिका की विफलता को उजागर किया. भारत ने रूस तेल खरीद को लेकर भी अमेरिका पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया और तर्क दिया कि चीन, तुर्की, और यूरोपियन यूनियन भी रूस से तेल खरीद रहे हैं, फिर भी उन पर इतना भारी टैरिफ नहीं लगाया गया. दूसरी ओर अमेरिका लगातार चीन को मोहलत दे रहा है, जबकि भारत पर एक महीने के भीतर की टैरिक की दरों को दोगुना कर दिया गया है.
भारत अपने हितों की रक्षा के लिए अडिग

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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