
'बीएमसी भ्रष्ट है', शशि रंजन का बड़ा हमला, बोले- अब धमकी आना तय...
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बीएमसी चुनाव से पहले शशि रंजन ने मुंबई की बदहाल सड़कों, सफाई और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए. आजतक के स्पेशल सेशन मुंबई मंथन में वो बोले कि- बीएमसी सबसे भ्रष्ट बॉडी है, धमकी मिले तो भी सच कहूंगा. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.
मुंबई में राजनीति चरम पर है. बीएमसी चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. बीएमसी चुनाव के साथ-साथ 29 अन्य नगर निगमों में मतदान 15 जनवरी को करवाया जाएगा. वहीं 16 जनवरी को घोषणा की जाएगी कि सत्ता किसके हाथ लगी है. ऐसे में इंडियन टेलीविजन अकैडमी के को-फाउंडर शशि रंजन ने सीधे तौर पर बीएमसी को लेकर सवाल उठाए हैं. आजतक के मुंबई मंथन में बातचीत करते हुए उन्होंने इसे सबसे भ्रष्ट बतायाय. साथ ही ये भी जाहिर कर दिया कि उन्हें अब धमकी जरूर मिलेगी
बीएमसी चुनाव के बीच, उनका काम कैसा लग रहा है?
शशि रंजन कहते हैं- मैं पिछले कुछ 20-25 वर्षों से सामाजिक कार्यों से जुड़ा हूं. बीएमसी का एक्सपीरियंस आम जनता से जुड़ा हुआ है. और मैं ओपनली कहना चाहूंगा कि वो सुखद नहीं है. जिस तरह की सड़कें, जिस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर है वो ठीक नहीं है. रोजमर्रा की चीजें हैं, पानी, चलने की सड़कें, सफाई ये सब बहुत ही बुरी हालत में हैं. खासतौर से जो सबर्ब्स का एरिया है. वो पिछले 6-7 सालों में इतना बुरा हो चुका है, क्योंकि लगातार खुदाई चल रही है. मेट्रो चल रही है. और कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हो रहा है.
'बीएमसी इतनी विशाल शहर को मैनेज करता है, मुझे नहीं लगता कि यहां पर एक कलेक्ट्रेट सक्षम है इसे संभालने में. सबर्ब्स के लिए दूसरा कलेक्टर होना चाहिए. अगर आप नोटिस करें तो, जब आप लोअर परेल से जाते हैं तो एक दूसरा बंबई दिखाई देता है. सड़कें साफ दिखाई देती है. एरिया भी अलग नजर आता है. और जों ही आप बांद्रा के पार जाना शुरू करते हो, वो बद से बदतर हो जाता है. जवाबदेही नाम की चीज है नहीं बीएमसी में, आप शिकायतें करें कुछ नहीं होता है.'
बीएमसी ने किया परेशान
शशि रंजन ने आगे कहा कि- ये कोई सुनी सुनाई बातें नहीं हैं. ये मेरा खुद का अनुभव है. क्योंकि बीएमसी से ज्यादा कोई और करप्ट बॉडी मुझे दिखाई नहीं देती है. लोअर लेवल के लोग इतना परेशान रहते हैं. घंटों-घंटों खड़े रहते हैं, कोई जवाब नहीं देता है. काम नहीं होता है. मैं क्यों हर रोज किसी ऑफिसर को कॉल करूं और बोलूं कि यहां पर सफाई नहीं हो रही है. मैं क्यों बताऊं कि गड्ढे कहां हैं. आप बताइये. ये काम आम नागरिक का नहीं है. आपके पास हजारों ऑफिसर्स हैं, ये देखने के लिए, वो क्यों नहीं करते.













