
बिहार से पलायन की कहानी... भिखारी ठाकुर ने 113 साल पहले 'बिदेसिया' में जैसा चित्र दिखाया था, आज भी वही हाल
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बिहार से रोजी-रोजगार, अच्छी शिक्षा की तलाश में छात्र-युवा बड़ी तादाद में बिहार से बाहर जाने को मजबूर हैं. पलायन के आंकड़ों की बात करें तो सरकार की ओर से पिछले साल मॉनसून सत्र के दौरान सितंबर महीने में एक प्रश्न के जवाब में पलायन के आंकड़े दिए गए थे.
बिहार सीरीज में आज पलायन की कहानी... भिखारी ठाकुर ने 113 साल पहले नाटक 'बिदेसिया' में जैसा चित्र दिखाया था, आज भी वैसे, क्यों नहीं बदले हालात? करोड़ों लोग चले गए, लेकिन सिर्फ लाखों की घरवापसी के लिए सरकार के पास जॉब प्लान, कैसे बदलेंगे हालात?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पलायन बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है. बिहार के पिछले चुनावों के ठीक बाद से ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और तेजस्वी यादव बेरोजगारी और शिक्षा के साथ पलायन का मुद्दा उठाते आ रहे हैं. जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) का चुनाव अभियान का ताना-बाना भी पलायन के इर्द-गिर्द ही बुनते नजर आ रहे हैं तो वहीं कांग्रेस भी कन्हैया कुमार की अगुवाई में 'पलायन रोको, नौकरी दो' पदयात्रा के साथ खुलकर मैदान में आ गई है. कन्हैया की यात्रा का आज (11 अप्रैल को) पटना पहुंचकर समापन हो गया है तो वहीं पीके की पार्टी गांधी मैदान में बिहार बदलाव रैली कर रही है. इन दोनों ही आयोजनों के सिरे पलायन के मुद्दे से जुड़ते हैं.
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पलायन को लेकर विपक्षी पार्टियां क्या कह रही हैं और सरकार की राय क्या है? इसकी चर्चा से पहले थोड़ा पीछे चलते हैं. भोजपुरी का शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर ने 113 साल पहले सन 1912 में एक नाटक लिखा था- बिदेसिया. इस नाटक के जरिये भिखारी ठाकुर ने पलायन के दर्द और परिवार के विरह का जीवंत चित्रण किया ही था, उन्होंने यह भी दर्शाया था कि पलायन करने वाले लोग किस कदर अपने परिवार और गांव-समाज से कट जाते हैं. किन हालातों में रहते हैं और किस तरह की दुश्वारियों का सामना उन्हें करना पड़ता है. तब से अब तक काल बदला, समाज बदला, हालात बदले लेकिन बिदेसिया में जैसा चित्र दिखाया गया था, पलायन की तस्वीर कमोबेश आज भी वैसी ही है.
क्या कहते हैं पलायन से संबंधित आंकड़े
बिहार से रोजी-रोजगार, अच्छी शिक्षा की तलाश में छात्र-युवा बड़ी तादाद में बिहार से बाहर जाने को मजबूर हैं. पलायन के आंकड़ों की बात करें तो सरकार की ओर से पिछले साल मॉनसून सत्र के दौरान सितंबर महीने में एक प्रश्न के जवाब में पलायन के आंकड़े दिए गए थे. इन आंकड़ों के मुताबिक बिहार से दो करोड़ 90 लाख से अधिक लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके थे. यह संख्या सिर्फ उन श्रमिकों की है जिन्होंने ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया है. ऐसे लोगों की तादाद भी बहुत बड़ी है जो पलायन कर चुके हैं लेकिन ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड नहीं हैं.

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