
बांग्लादेश की कोर्ट से नहीं मिली हिंदू संत चिन्मय दास को राहत, वकील पर हुआ हमला
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सुप्रीम कोर्ट के वकील रवींद्र घोष एक हफ्ते बाद चिन्मय दास के लिए कानूनी मदद लेने गए थे. बता दें कि कोई भी वकील चटगांव अदालत में चिन्मय की ओर से केस लड़ने को तैयार नहीं था क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथियों ने वकीलों को 'सार्वजनिक रूप से पीटने' की धमकी दी थी.
बांग्लादेश की चटगांव की एक अदालत ने जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास के लिए राहत की याचिका को खारिज कर दिया. चटगांव मेट्रोपोलिटन सत्र जज सैफुल इस्लाम ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के वकील द्वारा दायर जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके पास चिन्मय की ओर से पेश होने का पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं था.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के वकील रवींद्र घोष एक हफ्ते बाद चिन्मय दास के लिए कानूनी मदद लेने गए थे. बता दें कि कोई भी वकील चटगांव अदालत में चिन्मय की ओर से केस लड़ने को तैयार नहीं था क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथियों ने वकीलों को 'सार्वजनिक रूप से पीटने' की धमकी दी थी.
वकील पर हुआ हमला
रवींद्र घोष ने कहा कि जब वे बुधवार को याचिका दाखिल करने गए तो उन्हें अदालत के बाहर परेशान किया और हमला किया गया. बुधवार को सुनवाई के दौरान सैकड़ों वकील भी कोर्ट रूम में जमा हो गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई.
पिछली जमानत सुनवाई 3 दिसंबर को हुई थी, जब दास का कोई वकील मौजूद नहीं था, क्योंकि उनके वकील रामेन रॉय अस्पताल के आईसीयू में थे, जहां वे हमले में घायल हो गए थे.
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