
'बस बेटी का शव दे दो...', नागपुर ब्लास्ट के बाद परिजनों का फूटा गुस्सा, इस वजह से अब तक नहीं निकाली गईं 9 डेड बॉडी
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जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर बाजारगांव में स्थित सोलर इंडस्ट्रीज फैक्ट्री के प्रवेश द्वार पर कई एम्बुलेंस तैनात की गई थीं. स्थानीय निवासियों और श्रमिकों के रिश्तेदारों सहित लगभग 200 लोगों ने कारखाने के एंट्री गेट को घेर लिया, जिससे तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई.
महाराष्ट्र के नागपुर में सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड कंपनी में ब्लास्ट से हुई 9 लोगों की मौत के बाद, स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. गुस्साए स्थानीय लोगों और श्रमिकों के रिश्तेदारों ने नागपुर जिले में कंपनी के पास के राजमार्ग को जाम कर प्रदर्शन किया. मृतकों के परिजनों ने मांग की है कि, उन्हें शवों को देखने के लिए परिसर में एंट्री करने की अनुमति मिले. पुलिस के मुताबिक, बाद में भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, मृतकों के शव अभी भी परिसर के अंदर हैं. यह विस्फोट सुबह 9 बजे हुआ था, जिस घटना में नौ लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए.
जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर बाजारगांव में स्थित सोलर इंडस्ट्रीज फैक्ट्री के प्रवेश द्वार पर कई एम्बुलेंस तैनात की गई थीं. स्थानीय निवासियों और श्रमिकों के रिश्तेदारों सहित लगभग 200 लोगों ने कारखाने के एंट्री गेट को घेर लिया, जिससे तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई.
हादसे में बेटी की गई जान, पिता की उजड़ गई दुनिया नागपुर के पास विस्फोटक बनाने वाली फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने नीलकंठराव सहारे की दुनिया उजाड़ दी. अपने चेहरे पर हताशा भरे भाव के साथ, वह घबराए हुए फैक्ट्री के गेट के बाहर आगे-पीछे घूम रहा हैं. उनकी बेटी आरती (22) उन नौ लोगों में शामिल थी, जो सोलर इंडस्ट्रीज में रविवार सुबह हुए विस्फोट में मारे गए थे. वह उनके परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य थीं. आरती के पिता लकवाग्रस्त हैं इसलिए लंगड़ाकर चलते हैं और उनकी मां बोल नहीं सकती हैं. इसके अलावा घर में एक छोटी बहन है.
दो बच्चों की मां रुमिता उइके की भी गई जान औद्योगिक दुर्घटना में दो बच्चों की मां, बत्तीस वर्षीय रुमिता उइके की भी जान चली गई. उनके पिता देवीदास इरपति को भी अन्य लोगों के जरिए जानकारी मिली. विस्फोटक निर्माण इकाई के पास खैरी में रहने वाली रुमिता को रविवार को धामनगांव स्थित अपने पैतृक घर जाना था. देवीदास ने कहा कि रुमिता के दो बेटे हैं और उसका पति खेत मजदूर के रूप में काम करता है. देवीदास ने कहा, “हमें नहीं पता कि वे रुमिता का शव हमें कब सौंपेंगे. हम यहां उसका इंतजार कर रहे हैं.”
पुलिस ने कही ये बात एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल के पास विस्फोटक थे, उन्होंने कहा, विस्फोटकों को सुरक्षित रखने की जरूरत है और बम डिस्पोजल दस्ते मौके पर हैं. अधिकारी ने कहा कि विस्फोटकों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया चल रही है और उसके बाद शव बरामद किए जाएंगे. गुस्साए स्थानीय लोगों और पीड़ितों के रिश्तेदारों ने फैक्ट्री के बाहर अमरावती-नागपुर रोड जाम कर दिया.
आरती के पिता ने कहा, सुबह से कर रहे शव मिलने का इंतजार उन्होंने कारखाने के प्रवेश द्वार के सामने नारे लगाए और अमरावती-नागपुर राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया और मांग की कि उन्हें अपने परिजनों के शव देखने के लिए परिसर में प्रवेश करने की अनुमति दी जाए. एक अधिकारी ने बताया कि बाद में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर कर दिया. इलाके में भारी पुलिस सुरक्षा तैनात की गई. मृतकों में शामिल आरती सहारे के पिता ने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें सुबह 9.30 बजे अपनी बेटी की मौत के बारे में जानकारी मिली. वह अभी भी आगे की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं.

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