
बलूच लड़ाके पाकिस्तान में मचा रहे आतंक, क्यों इनके निशाने पर पंजाबी मूल के लोग, कब-कब हुए बड़े हमले?
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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सोमवार को हुए हमले में विद्रोहियों ने 23 लोगों की पहचान पूछकर उन्हें मार डाला. मृतक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से थे. पहले भी बलूच लड़ाके पंजाब के लोगों को निशाना बनाते रहे. ताजा हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है, लेकिन पंजाबियों से आखिर उनका क्या बैर है?
पड़ोसी देश पाकिस्तान में अंदरुनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही. हाल में बलूचिस्तान में स्थानीय मिलिटेंट्स ने बड़े हमले को अंजाम देते हुए पुलिस स्टेशन, रेलवे लाइन और हाईवे को निशाना बनाया, जिसमें 70 से ज्यादा मौतें हो गईं. लड़ाकों ने पहचान पूछकर पंजाबी मुसाफिरों की भी हत्या कर दी. बलूच आर्मी पहले भी टारगेट किलिंग करती आई है.
सोमवार सुबह कुछ हथियारबंद लड़ाकों ने बलूचिस्तान के मुसाखेल जिले से गुजर रहे ट्रकों और बसों को रोककर उनसे यात्रियों को उतारा. उनके पहचान पत्र देखे और फिर चुन-चुनकर टारगेट किलिंग की. इस हमले में सेना, पुलिस के अलावा 23 आम नागरिक मारे गए, जो पंजाबी थे. बाद में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने इसकी जिम्मेदारी ली.
बलूचिस्तान में यह पहली घटना नहीं
- इसी साल अप्रैल में, बलूचिस्तान के नोशकी शहर के पास आतंकवादियों ने पंजाबी यात्रियों के पहचान पत्र की जांच करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी थी.
- पिछले अक्टूबर में केच जिले में छह पंजाबी मजदूरों को मार दिया गया, जिसे खुद स्थानीय अधिकारियों ने टारगेट किलिंग माना था.
- साल 2015 में कुछ बंदूकधारियों ने तुर्बत के पास मजदूरों के एक कैंप पर अटैक कर 20 लोगों को मार दिया, जो सभी पंजाब और सिंध से थे.

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