
बच्चों के लिए वैक्सीन में कितना पीछे है भारत? अमेरिका-कनाडा कैसे निकले आगे, क्यों जरूरी है टीकाकरण
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भारत ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बच्चों पर को-वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल को मंज़ूरी दी है. भारत में ये ट्रायल दो से 18 साल से बच्चों पर किया जाएगा. ऐसे में अब उम्मीद जगी है कि बच्चों के लिए भी वैक्सीन जल्द उपलब्ध हो सकती है. बच्चों को वैक्सीन देने के मामले में भारत दुनिया में कहां खड़ा है, एक नज़र डाल लीजिए.
कोई भी काम करना हो, जब पूरी दुनिया आगे निकल जाती है तब हमारे यहां हलचल होती है. बच्चों की वैक्सीन पर भी यही हुआ है. अमेरिका और कनाडा में जब ट्रायल के बाद 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइज़र की वैक्सीन को मंज़ूरी मिल गई और जब वहां पर वैक्सीनेशन भी शुरू होने वाला है. तब भारत में बच्चों की वैक्सीन के ट्रायल में तेज़ी आई है. भारत ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बच्चों पर को-वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल को मंज़ूरी दी है. भारत में ये ट्रायल दो से 18 साल से बच्चों पर किया जाएगा. ऐसे में अब उम्मीद जगी है कि बच्चों के लिए भी वैक्सीन जल्द उपलब्ध हो सकती है. कोरोना की दूसरी लहर ने जो तबाही मचाई है, उससे हर कोई हिला हुआ है. अब तीसरी लहर में बच्चों पर संकट आ सकता है, ऐसे में चिंता और भी बढ़ने लगी है. भारत में को-वैक्सीन के ट्रायल को मंजूरी मिली है. जिसके बाद अब क्लीनिकल ट्रायल 2 से 18 साल के 525 बच्चों पर दिल्ली, पटना, नागपुर सहित देश के अलग-अलग अस्पतालों में किया जाएगा. इसके अलावा वैक्सीन के फेज़ 3 का ट्रायल शुरू करने से पहले भारत बायटेक को फेज़ 2 के ट्रायल का पूरा डाटा उपलब्ध करना होगा. बता दें कि ये बच्चों के लिए कोई अलग वैक्सीन नहीं है, ये भारत बायोटेक की वही को-वैक्सीन है, जो अभी कोविशील्ड के साथ-साथ भारत के टीकाकरण अभियान में इस्तेमाल की जा रही है. कंपनी जनवरी से ही बच्चों पर ट्रायल चलाने की कोशिश में जुटी हुई थी.More Related News

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