
बंधक लड़की की तस्वीरें, कोचिंग सेंटर-पीजी का सस्पेंस और झूठ पर झूठ... हैरान कर देगी अजब किडनैपिंग की गजब कहानी
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मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक प्राइवेट स्कूल के मालिक रघुवीर धाकड़ के मोबाइल पर एक वॉट्सऐप मैसेज आता है. उस मैसेज को पढ़ते ही रघुवीर के होश उड़ जाते हैं. मैसेज के साथ ही एक तस्वीर भी आई थी. वो तस्वीर रघुवीर की 20 साल की बेटी काव्या धाकड़ की थी.
Kota Student Kidnapping Drama Conspiracy: आए दिन हम आपको अपहरण या फिरौती से जुड़ी खबरें बताते और दिखाते हैं. कई खबरें आपको हैरान करती हैं तो कुछ परेशान. लेकिन आज जिस खबर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, यकीनन ऐसी खबर आपने पहले ना तो कभी सुनी होगी और ना कभी देखी होगी.
ये कहानी दो राज्यों के दो बड़े शहरों से जुड़ी है. कमाल की बात ये है कि इस कहानी का सिरा अभी अभी पुलिस की पकड़ में आया है, लेकिन मामला अभी तक सुलझा नहीं है. इस कहानी का आगाज़ होता है मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से..
18 मार्च 2024, दोपहर करीब 3 बजे मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक प्राइवेट स्कूल के मालिक रघुवीर धाकड़ के मोबाइल पर एक वॉट्सऐप मैसेज आता है. उस मैसेज को पढ़ते ही रघुवीर के होश उड़ जाते हैं. मैसेज के साथ ही एक तस्वीर भी आई थी. वो तस्वीर रघुवीर की 20 साल की बेटी काव्या धाकड़ की थी. काव्या धाकड़ पिछले छह महीने से शिवपुरी से दूर कोटा के एक कोचिंग इंस्टीट्यूट में नीट की तैयारी कर रही थी. काव्या को डॉक्टर बनना था. अब इस मैसेज को पढ़ते ही काव्या के पिता के होश उड़ चुके थे. उन्होंने फौरन अपनी बेटी के मोबाइल पर फोन किया. लेकिन उसका फोन बंद था.
अजब कहानी की शुरुआत काव्या से उनकी आखिरी बातचीत 17 मार्च की रात को हुई थी. बदहवास मां-बाप पहले शिवपुरी के लोकल पुलिस स्टेशन में पहुंचते हैं और फिर कोटा के लिए रवाना हो जाते हैं. इस बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल को फोन कर काव्या की बरामदगी की गुजारिश करते हैं. मुख्यमंत्री दफ्तर से कोटा पुलिस के आला अफसरों को खबर दी जाती है. इस बीच काव्या के मां-बाप भी कोटा पहुंच चुके थे. सच्चाई जानने के बाद अब कोटा पुलिस तफ्तीश शुरू करती है और यहीं से एक अजीब कहानी की शुरुआत होती है.
दाखिले के वक्त काव्या की मां गई थी साथ काव्या के मां-बाप के मुताबिक, काव्या 3 अगस्त 2023 को नीट की तैयारी करने के लिए कोटा के पीडब्ल्यू कोचिंग सेंटर पहुंची थी. वहीं उसका दाखिला हुआ था. उस रोज़ काव्या की मां भी उसके साथ कोचिंग सेंटर गई थी. कोचिंग सेंटर के बाद काव्या मां को एक पीजी में ले गई. जहां वो रहने वाली थी. बेटी को कोटा में दाखिला दिलाने और पीजी में छोड़ने के बाद काव्या की मां उसी दिन यानी 3 अगस्त की शाम को वापस शिवपुरी रवाना हो गई थी.
कोचिंग सेंटर में नहीं थी कोई काव्या काव्या की किडनैपिंग का मामला दर्ज करने के बाद कोटा पुलिस अपनी तफ्तीश की शुरुआत उसी पीडब्ल्यू कोचिंग सेंटर से करती है. काव्या के मां-बाप भी पुलिस टीम के साथ थे. पुलिस कोचिंग सेंटर के मालिक और मैनेजर से पूछताछ करती है कि उन्होंने आखिरी बार काव्या को कब देखा? पुलिस उन्हें काव्या की तस्वीर भी दिखाई. लेकिन जो जवाब कोचिंग सेंटर से मिलता है, उसे सुन कर पुलिस भी सन्न रह जाती है. पता चला कि काव्या धाकड़ नाम की कोई भी लड़की उस कोचिंग सेंटर में पढ़ती ही नहीं थी.

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