
बंकरों में हथियार थामकर खड़े हैं पढ़ने-लिखने वाले लड़के, पढ़ें Manipur के बफर जोन से ग्राउंड रिपोर्ट
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घुप अंधेरा, चारों तरफ सन्नाटे की चादर, छोटे-छोटे बंकर और उनमें हथियार थामकर खड़े 18 से 25 साल के लड़के. यह मंजर है मणिपुर के हिंसा प्रभावित इलाके का. आसपास फूंकी जा चुकी बसों के ढांचे पड़े हैं. आजतक की टीम ने यहां पहुंचकर सच्चाई को करीब से देखा. इस ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए मणिपुर की भयावह कहानी.
मणिपुर की राजधानी इंफाल और यहां से 45 किलोमीटर दूर बसा है कांगपोकपी शहर. कांगपोकपी से जब इंफाल की तरफ आगे बढ़ते हैं तो वह क्षेत्र आता है, जहां से घाटी शुरू होती है. इस इलाके से ही मैतेई और कुकी आबादी के क्षेत्र एक-दूसरे से अलग होते हैं. हिंसा के बाद इस इलाके को बफर जोन में तब्दील कर दिया गया है.
मणिपुर में हिंसा की भयावहता के बारे में जानने के लिए आजतक की टीम सीधे कांगपोकपी और इंफाल के बीच स्थित उस स्थान पर पहुंची. यहां अब भी हिंसा के निशान दिखाई दिए. जिन बसों को लोगों ने आग के हवाले कर दिया था, उनका ढांचा अब भी जस का तस वहीं खड़ा है. पहली बार में देखने पर यह इलाका किसी युद्ध क्षेत्र से कम नहीं लगता है.
किसी ने ट्रक फूंके तो किसी ने बसें
आगजनी के बाद कबाड़ में तब्दील हो चुकी बसों के बारे में जब स्थानीय लोगों से पूछा गया तो उन्होंने बताया,'कुकी समाज के लिए रसोई गैस की सप्लाई लेकर आ रहे ट्रकों को स्थानीय लोगों ने आग के हवाले कर दिया था. इसका बदला लेने के लिए कुकी समुदाय ने इंफाल की तरफ आने वाली दो बसों को रात के अंधेरे में फूंक दिया.'
'अपनी जमीन छोड़कर कहां जाएं?'

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