
'फ्लावर हैं महिलाएं...', खामेनेई के बयान पर इजरायल ने दिखाया आईना, पोस्ट की इस महिला की फोटो
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ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने कहा था कि महिला हाउसमेड की तरह नहीं होती बल्कि वे नाजुक फूल की तरह होती हैं. महिलाओं के साथ घर में फूल की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए. एक फूल की देखभाल करने की जरूरत होती है.
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कुछ दिन पहले महिलाओं को लेकर एक टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि महिलाएं हाउसमेड नहीं बल्कि फूल की तरह नाजुक होती हैं. खामेनेई के इस बयान पर अब इजरायल ने उन्हें आईना दिखा दिया है.
खामेनेई ने कहा था कि महिला हाउसमेड नहीं होती बल्कि वे नाजुक फूल की तरह होती हैं. महिलाओं के साथ घर में फूल की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए. फूल की देखभाल करने की जरूरत होती है.
खामेनेई ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि महिलाओं और पुरुषों की परिवार में अलग-अलग भूमिका होती है. उदाहरण के लिए पुरुष घर के खर्चों की जिम्मेदारी उठाते हैं जबकि महिलाओं की जिम्मेदारी होती है बच्चे पालना. इनमें कोई भी एक दूसरे से ओहदे में ऊंचा नहीं है बल्कि दोनों के गुण और योग्यताएं अलग-अलग हैं. खामेनेई के महिलाओं को लेकर इन्हीं 'नेक' विचारों के बाद इजरायल ने महसा अमीनी की तस्वीर पोस्ट कर जवाब दिया है.
लेकिन महसा अमीनी कौन है? और उसकी तस्वीर पोस्ट कर इजरायल, ईरान और खामेनेई को क्या संदेश देना चाहता है? दरअसल 22 साल की महसा अमीनी ईरान की कुर्दिश महिला थी, जो अपने भाई के साथ तेहरान गई थी. इस दौरान महसा ने हिजाब नहीं पहना था तो हिजाब पहनने के कानून का उल्लंघन करने के आरोप में ईरान की मॉरैलिटी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो ईरान की मॉरैलिटी पुलिस ने महसा को घसीटकर वैन में डाला और उनकी बेरहमी से पिटाई की थी. महसा को तेहरान के वोजारा डिटेंशन सेंटर ले जाया गया था. यहां पुलिस ने महसा को टॉर्चर किया, उनकी लगातार बेरहमी से पिटाई की गई. उनके सिर पर मुक्के मारे गए. इस बर्बरता की वजह से महसा कोमा में चली गईं और तीन दिन बाद 16 सितंबर 2022 को उनकी मौत हो गई.
लेकिन महसा अमीनी ईरान सहित कई इस्लामिक मुल्कों में प्रतिरोध का चेहरा बन गई. ईरान में इसके बाद जबरदस्त प्रदर्शन हुए, जिसे ईरान सरकार बर्बरता से कुचलता रहा. इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान का सबसे व्यापक विद्रोह बताया गया.

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