
फौजी अफसर, डांसर प्रेमिका और पहाड़ों में कत्ल... पुलिस ने 24 घंटे में किया मर्डर मिस्ट्री का खुलासा, जानें इनसाइड स्टोरी
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रायपुर पुलिस स्टेशन के थानेदार अब दल-बल के साथ बताई गई जगह पर पहुंचे. ख़बर बिल्कुल सही थी. सिरवालगढ़ की सुनसान सड़क पर झाड़ियों के बीच एक लड़की की लाश पड़ी थी. मरनेवाली लड़की की उम्र यही कोई 30-35 साल के आस-पास होगी. लड़की ने एक सिंगल पीस स्कर्टनुमा ड्रेस पहन रखी थी.
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पहाड़ियों में एक लड़की की लाश मिलती है. उसका हुलिया देखकर साफ पता चल रहा था कि वो लड़की किसी दूसरे राज्य से आई है. ये भी जाहिर था कि लड़की का कत्ल हुआ है. अब कातिल तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास सुराग के नाम पर सिर्फ 18 गाड़ियां थीं. इनमें से एक गाड़ी पर आर्मी लिखा हुआ था. वो गाड़ी जिस अफसर की थी, वो एक लेफ्टिनेंट कर्नल था. ऐसे सिर्फ एक गाड़ी की बिनाह पर एक आर्मी अफसर को कातिल कैसे ठहराया जा सकता था?
10 सितंबर 2023, सुबह 7 बजे देहरादून के रायपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को उस दिन सुबह-सुबह एक शख्स ने फोन किया. फोन करनेवाला इसी थाने की हद में पड़नेवाले एक गांव सोडा सरोली का ग्राम प्रधान था. लेकिन मामूली दुआ-सलाम के बाद ग्राम प्रधान ने एसएचओ साहब को जो बात बताई, उसने साहब के होश उड़ा दिए. ग्राम प्रधान का कहना था कि उनके इलाके में एक लड़की का कत्ल हो गया है. और लाश उन्हीं के थाना इलाके में सिरवालगढ़ की एक सुनसान सड़क के किनारे झाड़ियों में पड़ी है. फोन करने वाले ने ही ये भी बताया कि लड़की के जिस्म में और खास कर सिर पर चोट के निशान हैं.
सिरवालगढ़ में पड़ी थी लड़की की लाश रायपुर पुलिस स्टेशन के थानेदार अब दल-बल के साथ बताई गई जगह पर पहुंचे. ख़बर बिल्कुल सही थी. सिरवालगढ़ की सुनसान सड़क पर झाड़ियों के बीच एक लड़की की लाश पड़ी थी. मरनेवाली लड़की की उम्र यही कोई 30-35 साल के आस-पास होगी. लड़की ने एक सिंगल पीस स्कर्टनुमा ड्रेस पहन रखी थी. लाश पर चोट के कई निशान थे. खास कर सिर पर किसी भारी चीज से हमला किया गया था. हालांकि लाश के आस-पास कोई पर्स या आई कार्ड जैसी चीज नहीं थी, जिससे लड़की की पहचान साफ हो पाती.
पुलिस के सामने शिनाख्त की चुनौती हां, पास में ही एक टॉयलेट क्लीनर की खाली बोतल जरूर पड़ी थी. ऐसे में पुलिस के लिए सबसे पहले मरनेवाली लड़की की पहचान पता करने की ही चुनौती थी. एक खास बात ये भी थी कि चेहरे मोहरे से लड़की लोकल नहीं बल्कि भारत के उत्तर पूर्वी हिस्से या फिर नेपाल की रहनेवाली लग रही थी. अब अगर लड़की बाहर की थी, तो किसी लोकल थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने की गुंजाइश भी नहीं के बराबर थी. हालांकि पुलिस ने ऐसी किसी रिपोर्ट के बारे में पता किया, लेकिन उसके कामयाबी नहीं मिली.
पुलिस ने खंगाली कई CCTV कैमरों की फुटेज अब एक-एक कर पुलिस ने सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने का फैसला किया. हालांकि सिरवालगढ़ में जहां पर लाश फेंकी गई थी, वहां आस-पास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था. बल्कि ये एक सुनसान जगह थी. इसलिए पुलिस ने सिरवालगढ़ की तरफ जानेवाले तमाम सड़कों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने का फैसला किया. चूंकि लाश सुबह-सवेरे मिली थी, शक था कि लाश एक रोज़ पहले रात के अंधेरे में ही फेंकी गई हो. इस हिसाब से पुलिस के पास एक करीब 12 से 15 घंटों के समय का एक अंदाजा भी था. इस कोशिश में पुलिस ने करीब ढाई सौ गाड़ियों की जांच, जो सिरवालगढ़ की तरफ आती-जाती ही नजर आ रही थी. और इसके बाद उसने 18 ऐसी गाड़ियों को शॉर्ट लिस्ट किया, जिनका इस वारदात से वास्ता हो सकता था. इनमें गाड़ियों की मेक, उस पर लिखे शब्द, जाने और आने के बीच का टाइम गैप सबकुछ नोट किया गया.
ड्रेस के बार कोड से पुलिस को मिला सुराग वैसे जांच सिर्फ गाड़ियों के सहारे ही नहीं चल रही थी, बल्कि पुलिस दूसरे तरीकों से भी कातिल तक पहुंचने की कोशिश में लगी थी. इसी सिलसिले में पुलिस ने गौर किया कि मरने वाली लड़की ने जो सिंगल पीस स्कर्ट पहनी है, वो ज्यादा पुरानी नहीं है. यानी कुछ रोज पहले ही खरीदी गई है. पुलिस ने बारीकी से ड्रेस का मुआयना किया तो उसे ड्रेस में ही एक बारकोड भी मिला. तब पुलिस ने उस बारकोड के सहारे ड्रेस बेचने वाली दुकानों तक पहुंचने का फैसला किया. पुलिस जुडियो ब्रांड की इस ड्रेस के दो शो रूम जाखन और किशन नगर में पहुंची और इन दोनों ही शो रूम में पिछले चंद दिनों में कुल आठ ऐसे ड्रेस बेचने की बात कही.

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