
पीएम मोदी के लिए UAE ने ऐसा क्या किया कि पाकिस्तान चिढ़ा
AajTak
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे पर उनका स्वागत राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने किया. वो खुद पीएम को रिसीव करने अबू धाबी एयरपोर्ट पर गए थे जो कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन था. वहीं जब पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ यूएई गए थे तब उन्हें रिसीव करने यूएई के न्याय मंत्री पहुंचे थे. इसे लेकर पाकिस्तान में कुछ लोगों को लग रहा है कि वो अलग-थलग पड़ गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात यात्रा से पाकिस्तान को असुरक्षा की स्थिति महसूस हो रही है कि मुस्लिम देशों के बीच भी उसकी पैठ कम होती जा रही है और भारत की करीबी बढ़ती जा रही है.
पीएम मोदी को अबू धाबी हवाई अड्डे पर रिसीव करने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान पहुंचे थे. वहीं, जब मई में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ यूएई गए थे तब उनके स्वागत के लिए हवाई अड्डे पर यूएई के न्याय मंत्री पहुंचे थे. इसे लेकर पाकिस्तान को लग रहा है कि वो अलग-थलग पड़ गया है.
पाकिस्तान की विदेश नीति को लेकर ही नेशनल एसेंबली में विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार से सवाल किया गया कि क्या पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है? जवाब में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति सही दिशा में है और वो अलग-थलग नहीं पड़ा है. रब्बानी के इस जवाब पर पाकिस्तान के पूर्व राजनियक और भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने सवाल उठाए हैं.
उन्होंने कहा है कि जब शहबाज शरीफ की सरकार विपक्ष में थी तब यही लोग कहते थे कि पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है और अब सत्ता में आने के बाद पीटीआई की उपलब्धियों का सहारा लेकर ही ये कह रहे हैं कि हम अलग-थलग नहीं पड़े हैं.
अब्दुल बासित ने कहा, 'जब इनकी हुकूमत नहीं थी तब चाहे वो पीपल्स पार्टी के लोग हों या पीएमएल-एन के नेता हों, यही कहते थे कि पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया है....पीटीआई की सरकार ने कश्मीर को बेच दिया है, हमें किसी देश से फोन तक नहीं आता...इस तरह की ढेरों बातें. लेकिन आज हिना रब्बानी खार ने कहा कि पाकिस्तान अलग-थलग नहीं पड़ा है और इसके पीछे उन्होंने तीन तर्क दिए. पहला कि पाकिस्तान ओआईसी में विदेश मंत्रियों की परिषद का अध्यक्ष है तो हम किस तरह आइसोलेटेड है.'
बासित ने आगे कहा, 'दूसरा- हिना ने कहा कि हम यूएन मानवाधिकार परिषद के सदस्य हैं और हर बार ही हम उसका चुनाव जीतते हैं तो किस तरह आइसोलेटेड हैं. तीसरा जी-77 के हम अध्यक्ष हैं तो फिर किस तरह हम आइसोलेटेड हैं. उन्होंने बिल्कुल ठीक कहा लेकिन साथ ही वो ये भी कह देतीं कि ये तीनों चीजें पीटीआई की हुकूमत के तहत हुई थी. फिर आपलोग विपक्ष में थे तब क्यों कह रहे थे कि पाकिस्तान आइसोलेटेड हैं?'

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.





