
पाकिस्तान में जारी घमासान से सऊदी अरब और UAE क्यों घबराए हुए हैं?
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पहले से ही बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार की चौतरफा मार झेल रहा पाकिस्तान पिछले एक महीने से राजनीतिक अस्थिरता से भी जूझ रहा है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान में राजनीतिक उठापटक जारी रही तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और बद से बदतर होती जाएगी. परिणामस्वरूप लाखों पाकिस्तानी सऊदी अरब और यूएई का रुख कर सकते हैं जो दोनों देशों के लिए संकट का सबब बन सकता है.
पाकिस्तान पिछले दो सालों से आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है. अप्रैल 2022 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अविश्वास मत से सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में जारी आर्थिक और राजनीतिक संकट का एक मुख्य कारण यह भी है. उसके बाद पिछले महीने मई 2023 में भ्रष्टाचार के आरोप में इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और चरम पर पहुंच गई है. इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में आगजनी और हिंसा देखने को मिली.
आर्थिक संकट के बाद अब पाकिस्तान का राजनीतिक संकट उसके सहयोगी देश खासकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब के लिए चिंता पैदा कर दी है क्योंकि वर्तमान राजनीतिक संकट के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति भी लगातार खराब होती जा रही है. इससे पहले पाकिस्तान के सहयोगी देशों ने गंभीर आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान को इस शर्त पर वित्तीय सहायता देने का वादा किया था कि पाकिस्तान जल्द से जल्द अपने राजनीतिक संकट को हल करेगा.
देश में जारी राजनीतिक अराजकता के बीच पाकिस्तान में महंगाई दर रिकॉर्ड 36 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. पिछले एक साल में ही पाकिस्तानी रुपये की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले आधी हो गई है. पाकिस्तान सरकार के सामने एक गंभीर समस्या भी है कि पाकिस्तान पर बाहरी कर्ज भी बहुत ज्यादा है.
कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान
दिसंबर 2022 में पाकिस्तान के ऊपर कुल 126 बिलियन डॉलर का कर्ज था. लेकिन उच्च ब्याज दर और स्ट्रॉन्ग ग्रीनबैक के कारण पाकिस्तान के ऊपर कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा है. पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी न्यूनतम स्तर पर है. ऐसे में पाकिस्तान के ऊपर डिफॉल्ट होने का खतरा भी मंडरा रहा है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, मार्च 2023 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 4.2 अरब डॉलर रह गया है.
डिफॉल्ट होने से बचने के लिए पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत कर रहा है. साल 2019 में पाकिस्तान और IMF के बीच 6 बिलियन डॉलर के बेलआउट पैकेज पर समझौता हुआ था. लगभग एक साल बाद पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर देने पर सहमति बनी. लेकिन IMF ने यह बेलआउट पैकेज तब तक जारी करने से इनकार कर दिया जब तक कि IMF को यह गारंटी नहीं मिल जाती है कि पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय सहयोगी देश संयुक्त अरब आमीरात, सऊदी अरब और चीन भी आर्थिक रूप से मदद करेंगे.

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