
पाकिस्तान बन चुका है हमास, उससे निपटने के लिए भारत को क्यों इजरायल बनना ही होगा?
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पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का भरोसा टू नेशन थियरी में है. इसलिए वे हिंदू और मुसलमान को अलग देश ही मानते है. कश्मीर को हड़पने के लिए उनका ये तर्क वैसा ही जैसा हमास इजरायल को खत्म करने के लिए करता है.
पाकिस्तान अपने जन्म के बाद से ही कभी एक लोकतांत्रिक देश नहीं बन सका. जिस देश का जन्म ही एक गलत सिद्धांत को आधार बनाकर किया गया हो उसके फलने फूलने की क्या ही उम्मीद की जा सकती है. पहलगाम हमले के पहले जिस तरह पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हिंदू-मुस्लिम किया , पहलगाम हमले के बाद जिस तरह पाक मंत्रियों ने परमाणु हमले की धमकी दी वो सब यूं ही नहीं है. दरअसल पाकिस्तान से एक जिम्मेदार देश होने की उम्मीद की ही नहीं जा सकती है. अमेरिका जैसे ताकतवर देश से पाकिस्तान ओसाम बिन लादेन को छुपाता रहा. अमेरिका ने बिना बताए एबटाबाद में अपना ऑपरेशन किया. उसे पता था कि पाकिस्तान इतना जिम्मेदार देश नहीं है कि उस पर भरोसा किया जा सके. यही कारण है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह मान लेना कि पाकिस्तान से आतंकवादियों का खात्मा कर लिया जाएगा , बहुत बड़ी भूल होगी. भारतीय सेनाओं को पाकिस्तान से बहुत लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहना होगा.
पाकिस्तान हमास बन चुका है. इसके पीछे एक नहीं दर्जनों तर्क दिए जा सकते हैं. हमास ने इजरायली बंधकों को गाजा में करीब 55 हजार लोगों के मारे जाने के बाद भी रिहा नहीं किया. गाजा में जितने लोग मारे गए हैं उससे भी अधिक गंभीर रूप से घायल हैं. गाजा के पास न खाने के लिए भोजन है और न ही रहने के लिए मकान है पर जंग लड़कर गाजी बनने का जज्बा कायम है. चूंकि पाकिस्तान की भी हालत गाजा और हमास वाली हो गई है इसलिए भारतीय फौजों को तैयार रहना है कि यह जंग कभी खत्म नहीं होने वाली है. जैसे आज संडे दोपहर को पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि भारत कार्रवाई रोके पाकिस्तान भी रोकने के लिए तैयार है. पर भारतीय फौज को पाकिस्तानियों के झांसे में आने की जरूरत नहीं है. पाकिस्तानी हार मान लेंगे, युद्ध रोक देंगे पर आतंकी भेजकर पहलगाम जैसी घटनाओं को अंजाम देते रहेंगे. इसलिए जरूरी है कि भारत को अब इजरायल की तरह जीना होगा. आतंकवादियों को लगातार उनके बिल से निकालकार मारना होगा. जिस तरह इजरायल लगातार हमास के खिलाफ अभियान चलाता रहता है बिल्कुल उसी तरह लगातार अभियान चलाना होगा. ऐसा कहने के पीछे बहुत से कारण हैं . आइये देखते हैं.
1. पाकिस्तान पर आतंकवाद को पालने-पोसने का आरोप
भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, और कई अन्य देशों ने लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने, प्रशिक्षण देने, और वित्तीय मदद प्रदान करने का आरोप लगाया है. यह आरोप विशेष रूप से भारत के खिलाफ सक्रिय संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), और हक्कानी नेटवर्क से जुड़ा रहा है.
2008 में लश्कर-ए-तैयबा ने मुंबई पर अटैक किया. इस हमले में 166 लोग मारे गए. हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को पाकिस्तान लगातार संरक्षण देता रहा है. संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने LeT को आतंकी संगठन घोषित किया है. 2019 पुलवामा हमला, 2025 पहलगाम हमला, संसद पर हमला, मुंबई ट्रेन सीरियल ब्लॉस्ट, कांधार विमान हाईजैक आदि दर्जनों ऐसी घटनाएं हैं जिसमें पाकिस्तान सरकार का सीधे-सीधे आतंकियों को फंडिंग, ट्रेनिंग आदि देने का सबूत मिला था.
यही कारण रहा कि पाकिस्तान को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया ठीक नहीं रही. फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने 2018 से 2022 तक पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा, क्योंकि वह आतंकवादियों की फंडिंग को रोकने में विफल रहा. 2022 में उसे ग्रे लिस्ट से हटाया गया, लेकिन हाल के हमलों ने फिर से सवाल उठाए हैं. 5 मई 2025 की UNSC बैठक में, सदस्यों ने पहलगाम हमले में LeT की संभावित भूमिका पर विचार किया. 2017 में, तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बताया था.

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