
पाकिस्तान को जिसने दिया युद्धपोत उसी मुस्लिम देश पर US को भरोसा, समुद्र में चीन को टक्कर देने का प्लान
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जिस तुर्की ने हाल ही में पाकिस्तान को आधुनिक युद्धपोत सौंपे हैं, उसी पर अमेरिका भी भरोसा जता रहा है. अमेरिकी नौसेना को मजबूत करने और चीन के बढ़ते समुद्री दबदबे को रोकने के लिए यह अमेरिका-तुर्की की संभावित डील रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है.
जिस तुर्की ने हाल ही में पाकिस्तान की नौसेना को अत्याधुनिक युद्धपोत दिया है, उसी मुस्लिम देश से अब अमेरिका भी नौसैनिक जहाज निर्माण को लेकर बातचीत कर रहा है. इस संभावित डील का सीधा मकसद है - अमेरिकी नौसेना को मजबूत करना और समुद्र में बढ़ते चीन के प्रभाव को चुनौती देना है.
रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की और अमेरिका पिछले साल से नौसैनिक जहाज निर्माण में सहयोग को लेकर बातचीत कर रहे हैं. अमेरिकी नौसेना अपने बेड़े का विस्तार करना चाहती है, लेकिन दशकों की अनदेखी के चलते उसका शिपबिल्डिंग सेक्टर गंभीर संकट में है. ऐसे में अमेरिका अब सहयोगी देशों की मदद लेने पर मजबूर दिख रहा है.
हाल के वर्षों में तुर्की एक उभरती हुई नौसैनिक शक्ति बनकर सामने आया है. उसके शिपयार्ड एक साथ 30 से ज्यादा जहाज बनाने की क्षमता रखते हैं. तुर्की की डिफेंस कंपनियों ने MILGEM प्रोजेक्ट के तहत स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन तैयार किए हैं, जो तेज गति, स्टेल्थ क्षमता और आधुनिक हथियार सिस्टम से लैस हैं.
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत के दौरान यह भी देखा गया कि क्या तुर्की अमेरिकी नौसेना के लिए जहाजों के पुर्जे सप्लाई कर सकता है या फिर अतिरिक्त फ्रिगेट बनाने में मदद कर सकता है. ट्रंप प्रशासन अमेरिकी शिपबिल्डिंग को फिर से खड़ा करने और नौसेना का आकार बढ़ाने पर जोर दे रहा है.
जापान और दक्षिण कोरिया के भरोसे चल रहा था अमेरिका

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