पंजशीर में आज भी बिखरे हैं रूस की करारी हार के निशान, देखें वर्ल्ड एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
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Russia-Ukraine War: जिस तरह से यूक्रेन युद्ध में आज रूस के तेवर नजर आते हैं ठीक वैसे ही कभी सोवियत के दौर में भी रूस ने अफगानिस्तान में हमला किया था. USSR के समय 80 के दशक में एक बड़ी रूसी सेना ने अफगानिस्तान में जंग लड़ी थी. उन्होंने एक लंबा समय यहां गुजारा हथियारों और बमबारी वैसे ही की जैसे यूक्रेन में फिलहाल हो रही है लेकिन नतीजा वो नहीं निकला जो रूस चाहता था. उस दौर में अफगानी मुजाहिदीन के हाथों में भले ही ब्रिटिश काल के जमाने की बंदूकें थीं लेकिन इन्हीं के दम पर गुरिल्ला युद्ध में वो रूस पर भारी पड़ते थे. जब रूस ने हमलों की रफ्तार बढ़ाई तो अमेरिका ने अफगानी मुजाहिदीनों की मदद की. अमेरिकी हथियारों के दम पर तालिबान ने रूस को भागने पर मजबूर कर दिया आज हम आपको अफगानिस्तान से ऐसी तस्वीरें दिखाने जा रहे हैं जो देखने में आपको यूक्रेन युद्ध से आई तस्वीरों जैसी लगेंगे.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











