
नीदरलैंड में धुर दक्षिणपंथी और भारत समर्थक नेता गीर्ट विल्डर्स को मारने की खुली अपील करने वाले दो पाकिस्तानियों पर चलेगा केस
AajTak
नीदरलैंड की एक अदालत ने पाकिस्तान के उन दो नागरिकों के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया है, जिन्होंने गीर्ट विल्डर्स को खुलेआम जान से मारने की अपील की थी. इन पाकिस्तानियों की उम्र 55 और 29 साल है.
नीरदलैंड के धुर दक्षिणपंथी नेता गीर्ट विल्डर्स को मारने की अपील करने वाले दो पाकिस्तानियों के खिलाफ केस चलेगा. डच कोर्ट ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है. गीर्ट विल्डर्स को भारत का समर्थक और इस्लाम विरोधी माना जाता है. उनकी पार्टी नवंबर में नीदरलैंड में हुए चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और विल्डर्स ही नई सरकार का नेतृत्व भी करेंगे.
बुधवार को एक डच अदालत ने पाकिस्तान के उन दो नागरिकों के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया है, जिन्होंने गीर्ट विल्डर्स को खुलेआम जान से मारने की अपील की थी. इन पाकिस्तानियों की उम्र 55 और 29 साल है. अब इनके खिलाफ नीदरलैंड की अदालत में केस चलेगा.
कोर्ट ने अपने बयान में कहा है कि दोनों पाकिस्तानियों पर सार्वजनिक रूप से लोगों से विल्डर्स को मारने की अपील करने और ऐसा करने पर उन्हें जन्नत में इनाम देने का वादा किया गया था. हालांकि अदालत की ओर से ये नहीं बताया गया था कि वो कॉल कैसे किए गए थे.
बीते साल सितंबर महीने में डच अदालत ने पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर द्वारा सार्वजनिक रूप से विल्डर्स को मारने की अपील करने के लिए उसकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के बाद 12 साल की सजा सुनाई. विल्डर्स ने एक पोस्ट पर लिखा, "मुझे उम्मीद है कि दोनों संदिग्धों को प्रत्यर्पित कर दोषी ठहराया जाएगा और फिर जेल भेजा जाएगा."
नूपुर शर्मा के समर्थन में खड़े थे गीर्ट विल्डर्स
हालांकि नीदरलैंड और पाकिस्तान के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, जिससे मुकदमा चलाए जाने की संभावनाएं नहीं के बराबर हैं. बता दें कि मुस्लिम विरोधी पहचान बनाने वाले गीर्ट विल्डर्स हिंदुओं के पक्ष में आवाज उठाते रहते थे. हाल ही में उन्होंने बीजेपी की पूर्व नेता नूपुर शर्मा को लेकर कहा था कि वो एक बार उनसे मिलना चाहते हैं. इसके साथ ही नूपुर शर्मा प्रकरण में वो लगातार नुपूर के साथ खड़े हुए दिखाई दिए थे.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले से स्थापित वर्ल्ड ऑर्डर में हलचल ला दी. ट्रंप के शासन के गुजरे एक वर्ष वैश्किल उथल-पुथल के रहे. 'अमेरिका फर्स्ट' के उन्माद पर सवाल राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ का हंटर चलाकर कनाडा, मैक्सिको, चीन, भारत की अर्थव्यवस्था को परीक्षा में डाल दिया. जब तक इकोनॉमी संभल रही थी तब तक ट्रंप ने ईरान और वेनेजुएला में अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दुनिया को स्तब्ध कर दिया.






