
निशाने पर सलमान खान, बाबा सिद्दीकी का मर्डर और दहशत का माहौल... मुंबई अंडरवर्ल्ड में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की दस्तक!
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90 के दशक की शुरुआत में बॉम्बे शहर अंडरवर्ल्ड और गैंगवार से परेशान था. तब तक दाऊद इब्राहिम एक बड़ा डॉन बन चुका था. ये वो दौर था, जब तब के बॉम्बे और आज के मुंबई के सीने पर लगभग हर रोज गैंगवार या एनकाउंटर के नाम पर खून बहाए जाते थे.
Mumbai Underworld: क्या बाबा सिद्दीकी के कत्ल के बाद मुंबई में एक बार फिर से अंडरवर्ल्ड दस्तक देने जा रहा है? 70 के दशक में मुंबई में अंडरवर्ल्ड और डॉन की कहानी का आगाज हुआ था. जिसे खत्म करने में मुंबई पुलिस को तीन दशक से ज्यादा का वक्त लगा. क्या वो अंडरवर्ल्ड का दौर मुंबई में वापस लौटने वाला है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि मुंबई पुलिस और यहां तक कि एनआईए ने भी ये कहा कि लॉरेंस विश्नोई गैंग की नजर फिलहाल मुंबई पर है.
गैंगवार और एनकाउंटर में मारे जाते थे कई लोग 90 के दशक की शुरुआत. उस वक्त बॉम्बे अंडरवर्ल्ड और गैंगवार से परेशान था. दाऊद इब्राहिम तब तक एक बड़ा डॉन बन चुका था. ये वो दौर था, जब तब के बॉम्बे और आज के मुंबई के सीने पर लगभग हर रोज गैंगवार या एनकाउंटर के नाम पर खून बहाए जाते थे. ये वो दौर था, जब हर साल औसतन 100 से सवा सौ लोग गैंगवार या एनकाउंटर के नाम पर मारे जाते थे. बॉलीवुड, बिल्डर, बार मालिक और छोटे-बड़े बिजनेस मैन एक्टार्शन मनी वसूलना आम बात थी. तब मुंबई पुलिस पर चौतरफा दबाव था. इसी दबाव के चलते मुंबई पुलिस ने आखिरकार ये तय किया कि वो मुंबई से अंडरवर्ल्ड का सफाया करके रहेगी.
मुंबई में 500 से ज्यादा गैंगस्टर का एनकाउंटर इसी के तहत पहले एनकाउंटर की परंपरा की शुरुआत हुई, जिसमें 500 से ज्यादा गैंगस्टर पुलिस की गोलियों का शिकार बने. ऐसे कई एनकाउंटर पर सवाल भी उठे, लेकिन इन्हीं एनकाउंटर ने कई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को तब सुर्खियां भी दी. एनकाउंटर के साथ-साथ अंडरवर्ल्ड पर लगाम कसने के लिए सख्त कानून की जरूरत महसूस हुई तो महाराष्ट्र कंट्रोल आफ ओर्गिनाइज क्राइम एक्ट यानी मकोका जैसे कानून लाए गए. धीरे-धीरे ये तमाम कदम रंग दिखाने लगे. हजारों छोटे-बड़े गैंगस्टर अब जेल में थे. 2000 आते-आते धीरे-धीरे अब मुंबई अंडरवर्ल्ड से क्लीन होती जा रही थी.
अंडरवर्ल्ड के नासूर से ऐसे उबरा मुंबई शहर नवंबर 2002 में आखिरी बार दाऊद गैंग या डी कंपनी की तरफ से मुंबई में कोई शूटआउट हुआ था. अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली के गैंग ने 2008 में मुंबई में आखिरी मर्डर किया था. 2011 में क्राइम जनरलिस्ट जे डेय का कत्ल वो आखिरी कत्ल था, जो छोटा राजन गैंग के हाथों हुआ. गैंगस्टर अश्नविन नायक अंडरवर्ल्ड छोड़ कर बिल्डर बन चुका था. 2002 में पुर्तगाल में गिरफ्तारी के बाद अबू सलेम का गैंग तितर-बितर हो चुका था. कुल मिलाकर एक दो को छोड़ कर बाकी सभी डॉन और डॉन के गुर्गें जेलों में पहुंच चुके थे. मुंबई अब अंडरवर्ल्ड के नासूर से उबर चुका था.
एक बाद एक पकड़े गए कुख्यात गैंगस्टर 2003 में दाऊद के छोटे भाई एकबाल कासकर को दुंबई से डिपोर्ट कर मुंबई लाए जाने के बाद धीरे-धीरे दाऊद गैंग ने भी मुंबई में अपना आपरेशन पूरी तरह बंद तो नहीं लेकिन कम कर दिया. बाली से गिरफ्तार कर दिल्ली लाए गए छोटा राजन को तिहाड़ में बंद कर दिया गया, जहां वो उम्र कैद की सजा काट रहा है. अबू सलेम, अरुण गवली भी अलग-अलग केसों में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं. बंटी पांडे और रवि पुजारी जैसे गैंग्स्टर भी जेल के पीछे ही है. कुल मिलाकर मुंबई में एक तरह से अब अंडरवर्ल्ड का पूरी तरह से खात्मा हो चुका है. और बस यही वो चीज है, जिसने लॉरेंस बिश्नोई को मुंबई की तरफ आकर्षित कर दिया. सामने कोई राइवल गैंग नहीं है. ऐसे में अपने गैंग के लिए जमीन तैयार करना उसके लिए कही ज्यादा आसान है.
मुंबई अंडरवर्ल्ड में लॉरेंस गैंग की दस्तक बाबा सिद्दीकी की मौत के बाद मौत की वजह को लेकर फिलहाल पिचर साफ नहीं है. ज्यादातर लोगों के गले ये बात नहीं उतर रही कि बाबा सिद्दीकी का कत्ल सलमान खान को डराने के लिए किया गया था. हालांकि पुख्ता तौर पर बाबा सिद्दीकी के कत्ल के पीछे लॉरेंस गैंग का हाथ होने की बात अभी मुंबई पुलिस ने नहीं कही है, लेकिन लॉरेंस गैंग से तार जुड़ने की वजह से मीडिया में इस कत्ल के लिए लॉरेंस का ही नाम लिया जा रहा है. और यही से ये सवाल उठता है कि अगर सचमुच बाबा सिद्दीकी के कत्ल के पीछे लॉरेंस गैंग का ही हाथ है तो फिर वजह क्या है? कही वजह वो ही तो नहीं, जिसका डर है. यानी मुंबई अंडरवर्ल्ड में लॉरेंस गैंग की दस्तक.

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