
निक्की भाटी केस ने खोली काली हकीकत, हर दिन 18 लड़कियों को निगल रहा दहेज का दानव, हर तीसरा केस UP से
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निक्की भाटी की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर से देश में दहेज के दानव की क्रूरता सबके सामने ला दी है. इस देश में जहां हर दिन 18 बेटियां दहेज के लिए बलि चढ़ाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि बेटियों के पक्ष में दहेज के खिलाफ सख्त कानून हैं. ये विडंबना ही है कि इतने प्रयासों के बावजूद दहेज लोभियों से बेटियां बचा पाना मुश्किल हो रहा है. यहां दिए आंकड़े आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे.
26 साल की निक्की भाटी की बेरहमी से दहेज के लिए हुई हत्या चौंकाने वाली है. सोशल मीडिया में तैरते उसके छह साल के मासूम बेटे का वीडियो शरीर में झुरझुरी पैदा करने वाला है. जिसमें वो बता रहा है कि मेरी आंखों के सामने मेरी मां को पिता ने जला दिया. घटना भीतर तक तोड़ने वाली है लेकिन दुर्भाग्य से ये अकेली घटना नहीं है. दशकों से इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बने हुए हैं, फिर भी हर साल भारत में हजारों मासूम औरतें दहेज की भेंट चढ़ जाती हैं.
डराते हैं ये आंकड़े
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, साल 2022 में भारत में 6,450 दहेज हत्याएं दर्ज हुईं. यानी औसतन हर दिन 18 औरतें दहेज की वजह से जान गंवा देती हैं. साल 2018 से 2022 के बीच कुल 34,477 औरतों की जान इस हिंसा ने ले ली.
इस समस्या का फैलाव हर जगह एक जैसा नहीं है. उत्तर प्रदेश लगातार सबसे ज्यादा दहेज हत्याओं वाला राज्य रहा है. साल 2022 में अकेले यूपी में 2,138 केस दर्ज हुए. इसके बाद बिहार में 1,057 और मध्य प्रदेश में 518 मामले आए. दक्षिण भारत की तस्वीर कुछ अलग है, यहां कर्नाटक में 165, तेलंगाना में 137 और केरल में सिर्फ 11 केस दर्ज हुए.
यूपी की सबसे खौफनाक तस्वीर
पिछले 5 साल (2018-2022) में यूपी ने 11,488 दहेज हत्याओं के मामले दर्ज किए. यानी औसतन हर दिन 6 औरतों की जान सिर्फ दहेज की वजह से गई. इसका मतलब यह हुआ कि देश में होने वाली हर तीसरी दहेज हत्या सिर्फ यूपी में होती है. यहां दहेज मौत का औसत 10.3 प्रति लाख महिलाएं है, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.2 है. बिहार में ये आंकड़ा 8.9, मध्य प्रदेश में 6.6, राजस्थान में 5.7 और पश्चिम बंगाल में 4.8 है.

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