
नशा छुड़ाओ केंद्र पर बड़ी कार्रवाई... 25 लोगों की जगह ठूंसे गए थे 125 मरीज, पुलिस ने दबिश देकर किया रेस्क्यू
AajTak
पंजाब के जालंधर में एक प्राइवेट नशा छुड़ाओं केंद्र की हकीकत तब सामने आई, जब प्रशासन ने रेड डालकर 102 लोगों को वहां से रिहा कराया. समरा पैलेस में बने इस अवैध डि-एडिक्शन सेंटर में मरीजों को अमानवीय हालात में रखा गया था. न इलाज, न खाना, बस मारपीट और मानसिक प्रताड़ना.
पंजाब में जालंधर जिले के समरावा गांव में स्थित समरा पैलेस के अंदर चल रहे एक अवैध नशा छुड़ाओ केंद्र पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. यहां डीसी हिमांशु अग्रवाल और तहसीलदार की अगुवाई में पुलिस ने छापेमारी कर इस प्राइवेट डि-एडिक्शन सेंटर से 102 मरीजों को रेस्क्यू किया. बताया गया कि यह सेंटर मान्यता प्राप्त नहीं था और यहां पर गंभीर अमानवीयता के साथ मरीजों को रखा जा रहा था.
गढ़शंकर के रहने वाले इंद्रपाल ने बताया कि यह एक प्राइवेट सेंटर था, जहां सिर्फ 20 से 25 लोगों के रहने की व्यवस्था थी, लेकिन वहां 125 से अधिक मरीजों को ठूंसा गया था. इनमें से कोई आठ महीने से तो कोई दो साल से सेंटर में बंद था. मरीजों के मुताबिक, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था.
रेड के दौरान पुलिस को पता चला कि सेंटर में इलाज के नाम पर नशा छुड़ाने की कोई दवाई नहीं दी जाती थी. सेंटर का एमडी सुखविंदर सिंह सुखी है, जिस पर मारपीट और अमानवीय व्यवहार का आरोप लगा है. एक पीड़ित ने बताया कि अगर कोई मरीज ज्यादा या कम खाना खा लेता था, तो उसे दो दिन तक दीवार की ओर मुंह करके बैठने की सजा दी जाती थी. यहां मरीजों को सिर्फ दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक ही सोने की अनुमति थी. जरा सी गलती पर उन्हें 5-6 कर्मचारी मिलकर पीटते थे.
यह भी पढ़ें: लखनऊ के सरकारी रिहैब सेंटर में 4 बच्चों की मौत, 20 बीमार... CM योगी पहुंचे अस्पताल, जाना मासूमों का हाल
इस सेंटर में भर्ती मरीजों को परिजनों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती थी. जब भी परिजन मिलने आते, तो बाहर से ही कह दिया जाता था कि मरीज की हालत ठीक नहीं है और उन्हें वापस भेज दिया जाता था. सेंटर के कर्मचारियों पर आरोप है कि मरीजों से सफाई और अन्य काम करवाए जाते थे, जबकि इलाज के नाम पर कुछ नहीं किया जाता था.
15 से 30 हजार फीस, खर्च सिर्फ 2-3 हजार

अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस,इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है. मेन टारगेट न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नंटाज, इस्फाहान), IRGC कमांडर्स, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज और स्ट्रैटेजिक बेस हैं. ट्रंप ने प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर धमकी दी है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. अरब देश युद्ध से डर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.







