
नवी मुंबई में ‘जंगल की जमीन’ का खेल! बीजेपी नेता जे.एम. म्हात्रे पर ED की बड़ी कार्रवाई, 69.47 करोड़ की संपत्ति अटैच
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नवी मुंबई में वन भूमि के कथित अवैध अधिग्रहण और 42.4 करोड़ रुपये के मुआवजे मामले में ED ने बीजेपी नेता जे.एम. म्हात्रे की 69.47 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर ली है. यह मामला लगातार चर्चाओं में बना हुआ है. जानिए इस केस की पूरी कहानी.
महाराष्ट्र के नवी मुंबई में सरकारी जमीन को लेकर एक बड़ा खेल किया गया था, जिसकी भनक किसी को नहीं लगी थी. लेकिन जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में हाथ डाला तो हर कोई हैरान रह गया. यह मामला है रायगढ़ जिले के पनवेल तालुका के मौजे वहाल की उन जमीनों का, जो कभी सरकारी रिकॉर्ड में वन विभाग के नाम दर्ज थीं. लेकिन समय के साथ इन जमीनों की किस्मत बदलती चली गई.
आरोप है कि इन जमीनों को अवैध तरीके से अपने नाम करवाकर करोड़ों की हेराफेरी की गई. इसी सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है.
ED का प्राविजनल अटैचमेंट ऑर्डर मुंबई जोनल ऑफिस की ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत प्राविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है. इस आदेश के तहत उरण और उलवे, नवी मुंबई में स्थित तीन अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है. इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 17.74 करोड़ रुपये बताई गई है. ये संपत्तियां बीजेपी नेता जे.एम. म्हात्रे और उनकी पत्नी से जुड़ी हैं. ED का दावा है कि यह संपत्ति कथित तौर पर अवैध लेन-देन से अर्जित की गई है.
कौन हैं जे.एम. म्हात्रे? जे.एम. म्हात्रे राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. वह पहले कई वर्षों तक पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी (PWP) से जुड़े रहे. साल 2025 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके अलावा वे पनवेल म्युनिसिपल काउंसिल के प्रमुख भी रह चुके हैं. स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव माना जाता रहा है. अब इसी राजनीतिक सफर के बीच उन पर गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं.
जमीन का असली खेल? जांच में सामने आया कि सर्वे नंबर 427/1 (41.70 हेक्टेयर) और 436/1 (110.60 हेक्टेयर) की जमीन महाराष्ट्र सरकार ने 1975 में महाराष्ट्र प्राइवेट फॉरेस्ट (अधिग्रहण) अधिनियम के तहत अधिग्रहित की थी. इसके बाद 7/12 रिकॉर्ड में मालिकाना हक वन विभाग, महाराष्ट्र सरकार के नाम दर्ज कर दिया गया था. यानी यह जमीन कानूनी रूप से सरकारी वन भूमि थी, लेकिन यहीं से कथित गड़बड़ी की कहानी शुरू होती है.
म्यूटेशन एंट्री में कथित छेड़छाड़ ED की जांच के मुताबिक, जमीन के म्यूटेशन रिकॉर्ड में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई. वन विभाग का नाम हटाकर आरोपी जे.एम. म्हात्रे और अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए. यह बदलाव अवैध तरीके से किया गया बताया जा रहा है. इस कथित फर्जीवाड़े के बाद जमीन का कुछ हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को बेच दिया गया. यही सौदा आगे चलकर करोड़ों के मुआवजे का कारण बना.

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