
नवाज शरीफ को राजनीति से बाहर करने की कोशिशें नाकाम: बेटी मरियम नवाज
AajTak
द डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, एक बयान में पूर्व प्रधानमंत्री ने नए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ईसा के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं और उम्मीद जताई कि नियुक्ति से पाकिस्तान की न्यायपालिका की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा बढ़ेगी.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को राजनीति से दूर करने की कोशिशें बुरी तरह विफल रही हैं, उनकी बेटी और पीएमएल-एन पार्टी की वरिष्ठ नेता मरियम नवाज ने ये बातें कही हैं. मरियम ने उम्मीद जताई है कि नए प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद शीर्ष न्यायाधीश, न्यायपालिका अब न्याय की रक्षा करेगी.
रविवार को पाकिस्तान के 29वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति काजी फ़ैज़ ईसा के शपथ ग्रहण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पार्टी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष मरियम ने उम्मीद जताई कि अब अदालतें न्याय को प्राथमिकता देंगी.
पीएमएल-एन पार्टी के मुख्य आयोजक ने दावा किया कि उनके पिता नवाज और उनके भाई शहबाज को राजनीति से दूर करने के प्रयास बुरी तरह विफल रहे हैं. न्यायपालिका अब न्याय को बरकरार रखेगी.
49 वर्षीय मरियम, पूर्ववर्ती न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) उमर अता बंदियाल की मुखर आलोचक थीं, उन्होंने उन पर पक्षपात करने और कुछ मामलों में अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया था.
द डॉन अखबार ने उनके हवाले से कहा, 'न्याय का पैमाना प्रत्येक नागरिक के लिए संतुलित होगा और पीएमएल-एन सुप्रीमो, अन्य पार्टी नेताओं के साथ, 'प्रोजेक्ट इमरान' कार्यकर्ताओं द्वारा उनके साथ किए गए अन्याय से छुटकारा दिलाएंगे.'
इस बीच, नवाज के छोटे भाई, पूर्व प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी नए सीजेपी की नियुक्ति के बाद न्याय की संभावना को रेखांकित किया.

ग्रीनलैंड में अमेरिका और नाटो देश अब सीधे आमने सामने आ गए हैं. ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस के तहत स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नार्वे समेत कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में अपनी सेनाएं भेजनी शुरू कर दी है. यह कदम डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार के बयानों के बाद उठाया गया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने घोषणा की है कि फ्रांस की सेना का पहला दस्ते पहले ही रवाना हो चुका है और आगे और सैनिक भेजे जाएंगे.

ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच एक कनाडाई नागरिक की मौत हो गई है. कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ईरानी अधिकारियों के हाथों इस नागरिक की जान गई है. कनाडा ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी शासन की निंदा की है और नागरिकों के खिलाफ हो रही हिंसा को तत्काल रोकने की मांग की है.

अमेरिका ने ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के हिंसक दमन के आरोप में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और तेल से जुड़े शैडो बैंकिंग नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं. ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इन नेटवर्कों के जरिए अरबों डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी. कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की अधिकतम दबाव नीति का हिस्सा है.

अमेरिका ने कैरिबियन सागर में वेनेजुएला-संबंधित तेल टैंकर Veronica को जब्त कर लिया है, जो पिछले कुछ हफ्तों में छठा लक्ष्य बना है. यह कार्रवाई राष्ट्रपति ट्रम्प और विपक्षी नेता मारिया कोरीना माचाडो के बैठक से पहले हुई. अमेरिकी सेना का कहना है कि टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और अब सिर्फ कानूनी रूप से तेल ही निकलेगा.

क्या अगले 24 घंटे में अमेरिका ईरान पर हमला करेगा. इस वीडियो में जानिए क्यों अमेरिका ने ईरान के आसपास अपने सैन्य युद्ध के घेरा को मजबूत करना शुरू कर दिया है. मध्य-पूर्व में एक बड़े सैन्य टकराव की संभावना बन रही है. इस दौरान अमेरिका के युद्ध के पांच बड़े संकेत देखने को मिल रहे हैं. इनमें प्रमुख हैं टैंकर विमानों की उड़ानें, ईरान का बंद एयरस्पेस और मिलिट्री अलर्ट, USS अब्राहम लिंकन बेड़े की युद्घ स्थल की ओर बढ़ती हलचल, अल उदीद एयरबेस पर सैनिकों की तैनाती में बदलाव, और ट्रंप द्वारा ईरान पर तेज हमला करने की इच्छा.

ईरान में इस्लामिक शासन और आर्थिक कठिनाईयों के बीच व्यापक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. दो हज़ार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और कई हजार गिरफ्तार हैं. सरकार ने प्रदर्शनकारियों को फांसी पर लटकाने की सजा दी है जिससे जनता में भय व्याप्त है. अमेरिका ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है और लगभग पचास टारगेट्स पर एयर स्ट्राइक की तैयारी कर रहा है. ईरान की मौजूदा स्थिति चिंताजनक है और भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षा हेतु सलाह जारी की है.

लंदन में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग ने एक नाबालिग सिख लड़की का यौन शोषण किया. घटना का पता लगते ही सिख समुदाय भड़क उठा. अब लंदन की सड़कों पर उनका प्रोटेस्ट जारी है. लंदन समेत पूरे ब्रिटेन में सिखों की अच्छी-खासी आबादी है. सामाजिक-आर्थिक तौर पर भी यह समुदाय औसत ब्रिटिश नागरिकों से बेहतर स्थिति में है. फिर कनाडा की बजाए ये देश उतना लोकप्रिय क्यों नहीं?






