
देश में 10 लाख बच्चे कुपोषित, 19 लाख लोग भूखे पेट सोते हैं... दुनिया को कैसे अनाज बांटेगा भारत?
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सबसे ज्यादा अनाज पैदा करने वाला भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. फिर भी ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी नीचे है. भारत में आज भी 5 साल से कम उम्र के 32% बच्चे ऐसे हैं, जिनका वजन उनकी उम्र के हिसाब से कम है.
'भारत में आज भी 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. करीब 19 करोड़ लोग ऐसे हैं जो हर रात भूखे पेट ही सो जाते हैं. 6 से 23 महीने के करीब 90 फीसदी बच्चों को पर्याप्त डाइट नहीं मिल पाती.'
ये कुछ आंकड़े हैं जो भारत में भूख और खाने की कमी के हालात बयां करते हैं. ये सब आंकड़े उस भारत के ही हैं जो दुनिया में सबसे ज्यादा अनाज पैदा करने में दूसरे नंबर पर है.
इन सब बातों का जिक्र इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि अगर विश्व व्यापार संगठन (WTO) अनुमति दे, तो भारत दुनिया को अनाज की आपूर्ति करने के लिए तैयार है. पीएम मोदी ने ये बातें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से कही थीं, जिसके बारे में उन्होंने बताया.
पीएम मोदी ने कहा, मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से हमारे यहां अनाज के भंडार भरे हुए हैं. अगर WTO हमें अनुमति दे तो हम उससे पूरी दुनिया का पेट भर सकते हैं. हमें परमिशन मिले तो हम अपने अनाज को पूरी दुनिया में भेज सकते हैं.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनाज के भंडारण में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है. अमेरिका की फॉरेन एग्रीकल्चर सर्विस (FAS) के मुताबिक, दुनिया में सबसे ज्यादा चावल और गेहूं का उत्पादन चीन के बाद भारत में होता है. लेकिन इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 116 देशों की लिस्ट में 101वें नंबर पर है.
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 2019-20 में भारत में 1076 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था. वहीं, 2020-21 में 1023 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था. एक अनुमान के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल 4902 लाख टन चावल और 6020 लाख टन गेहूं की खपत होती है. यानी, भारत में हर साल गेहूं और चावल की जितनी पैदावार होती है, उससे दुनिया की 15 से 20 फीसदी जरूरत पूरी हो सकती है.

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