
दुनिया की सबसे खतरनाक जेल जहां पर कैद थे तालिबान के खूंखार आतंकी
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Guantnamao Jail: 11 सितंबर 2011 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर ओसामा बिन लादेन ने हमला कराया था. अमेरिका ने चार महीनों बाद ही एक हाई-सिक्योरिटी जेल का निर्माण कर दिया जहां दुनिया के कई आतंकवादियों को पनाह दी जाती रही है. क्यूबा में स्थित इस जेल का नाम है ग्वांतनामो बे जेल. अफगानिस्तान के तालिबान में सरकार बनते ही दुनिया की ये सबसे खतरनाक जेल एक बार फिर सुर्खियों में है.
11 सितंबर 2011 को अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर ओसामा बिन लादेन ने हमला कराया था. अमेरिका ने चार महीनों बाद ही एक हाई-सिक्योरिटी जेल का निर्माण कर दिया जहां दुनिया के कई आतंकवादियों को पनाह दी जाती रही है. क्यूबा में स्थित इस जेल का नाम है ग्वांतनामो बे जेल. तालिबान के कैबिनेट मंत्रियों में खैरुल्लाह खैरख्वा (मिनिस्टर ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कल्चर), अब्दुल हक (इंटेलीजेंस चीफ), मुल्ला नुरुल्लाह नूरी (मिनिस्टर ऑफ बॉर्डर एंड ट्राइबल अफेयर्स) भी इस जेल में सजा काट चुके हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images) काबुल पर कब्जे के बाद गुलाम रूहानी नाम के तालिबानी कमांडर ने राष्ट्रपति के महल से जीत का भाषण दिया था. गुलाम रूहानी पांच सालों तक ग्वांतनामो जेल में बंद था. सिर्फ रूहानी ही नहीं बल्कि अपने अस्तित्व में आने के बाद से इस जेल में 780 लोगों को कैद किया गया है. आतंक के खिलाफ युद्ध के चलते बनाई गई इस जेल में अब 39 कैदी बचे हैं.(प्रतीकात्मक तस्वीर/Getty images)
कोलंबिया में एक विमान क्रैश हो गया, हादसे में मरने वालों की संख्या 66 हो गई है. कोलंबिया वायुसेना का विमान हरक्यूलिस सी-130 विमान रनवे से उड़ान भरते समय क्रैश कर गया. कोलंबियाई वायु सेना के विमान हादसे के बाद तुरंत बचावकर्मी मौके पर पहुंचे और अभियान शुरू किया. जानकारी के मुताबिक विमान में 125 लोग सवार थे.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.









