
दिल्ली की साफ हवा में सांस लेने के लिए करना होगा नए साल का इंतजार, दिसंबर तक प्रदूषण से नहीं मिलेगी राहत
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Central Pollution Control Board (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली की साफ हवा में सांस लेना है तो नए साल का इंतजार करना होगा. दिल्ली में दिसंबर तक एक्यूआई लेवल में सुधार के संकेत नहीं है.
दिल्ली की हवा अभी भी बेहद खराब है. मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो दिल्ली की साफ हवा में सांस लेना है तो नए साल का इंतजार करना होगा. फिलहाल राहत के कोई आसार नहीं हैं. CPCB के डेटा के मुताबिक, दिल्ली में दिसंबर तक एक्यूआई लेवल में सुधार के संकेत नहीं है. दिल्ली में पिछले 443 दिनों में एक भी 'अच्छी' हवा वाला दिन नहीं रहा है और मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय राजधानी में इस वर्ष का अंत संभवतः 'स्वच्छ हवा' वाले किसी दिन के बिना ही होगा. दिल्ली को दिसंबर तक नहीं मिलेगी प्रदूषण से राहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली बार दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक सितंबर 2023 में 'अच्छी' श्रेणी में था. सीपीसीबी के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल 10 सितंबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 45 था , जिसे 'अच्छा' माना जाता है. बता दें कि 50 या इससे कम AQI को 'अच्छा' माना जाता है; 51 और 100 के बीच होने पर 'संतोषजनक'; 101 और 200 के बीच होने पर 'मध्यम'; और 201 और 300 के बीच होने पर 'खराब', 301 और 400 के बीच होने पर 'बहुत खराब'; जबकि 400 से ऊपर होने पर 'गंभीर' माना जाता है.
इस वर्ष दिल्ली में सबसे स्वच्छ वायु रिकार्ड 13 सितम्बर को दर्ज किया गया था, जब AQI 52 पर पहुंच गया था. बीते मंगलवार को AQI 343 पर था जो 'बहुत खराब' श्रेणी में था. पिछले कुछ हफ़्तों से राजधानी में प्रदूषण का सबसे बुरा दौर चल रहा है, जब से इस क्षेत्र में निगरानी शुरू हुई है. 18 नवंबर को AQI 494 तक पहुंच गया था, जिसे 'गंभीर प्लस' श्रेणी में रखा गया था. 13 नवंबर के बाद से दिल्ली में लगातार 'गंभीर' AQI दर्ज किया गया है. चेक करें आज का AQI
अलीपुर- 306 आनंद विहार- 322 अशोक विहार- 312 बवाना- 338 करणी सिंह स्टेडियम- 296 जहांगीरपुरी- 329 मंदिर मार्ग- 285 मुंडका- 366 नरेला- 266 पटपड़गंज- 310 पंजाबी बाग- 326 रोहिणी-321 शादीपुर- 378 सोनिया विहार- 312 विवेक विहार- 317 वजीरपुर- 329तीव्र प्रदूषण वाले दिनों में वृद्धि
मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर और अधिक गंभीर होता जा रहा है. जबकि वायु गुणवत्ता डेटा से पता चलता है कि औसत वार्षिक AQI रिकॉर्डिंग में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं आया है, अल्ट्राफाइन पार्टिकुलेट मैटर या PM2.5 के स्तर, जो आंतरिक अंगों में प्रवेश करते हैं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं हर साल बढ़ रहे हैं. पर्यावरण थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के विश्लेषण से पता चला है कि 2023 में दिल्ली का वार्षिक औसत PM2.5 स्तर 100.9 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (ug/m3) था. यह 2022 की तुलना में दो प्रतिशत अधिक और 2020 की तुलना में छह प्रतिशत अधिक था, जब कोविड लॉकडाउन के कारण शहर की हवा असाधारण रूप से साफ थीय
विश्लेषण में दिल्ली के पांच सबसे पुराने वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों- आईटीओ, आईएचबीएएस, मंदिर मार्ग, पंजाबी बाग और आरके पुरम से दीर्घकालिक तीन साल की औसत रिकॉर्डिंग में भी इसी तरह का पैटर्न दिखा. 2021-23 का औसत 2020-22 की अवधि की तुलना में लगभग तीन प्रतिशत अधिक था. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) द्वारा जारी वर्ष के अंत में वायु गुणवत्ता विश्लेषण के अनुसार, 2023 में दिसंबर के लिए औसत मासिक एक्यूआई रिकॉर्डिंग 348 थी, जो दिसंबर 2018 के बाद से सबसे अधिक है जब यह 360 थी.
मंत्रालय के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि 2023 में दिल्ली में 60 'संतोषजनक' वायु दिन, 145 'मध्यम' दिन, 77 'खराब' दिन, 67 'बहुत खराब' दिन और 13 'गंभीर' AQI दिन दर्ज किए गए. महानगर में दो 'गंभीर प्लस' दिन भी देखे गए जब AQI ने 450 अंक को पार किया. दूसरी तरफ 2022 में दिल्ली में तीन 'अच्छे' एक्यूआई दिन, 65 'संतोषजनक' दिन, 95 'मध्यम' दिन, 130 'खराब' वायु दिन, 66 'बहुत खराब' दिन और केवल छह दिन दर्ज किए गए जब एक्यूआई 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा. इस वर्ष कोई भी 'गंभीर प्लस' दिन दर्ज नहीं किया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की बिगड़ती वायु गुणवत्ता, न केवल राजधानी के लिए बल्कि पूरे सिंधु-गंगा मैदानी क्षेत्र (आईजीपी) के लिए प्रदूषण प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित, दीर्घकालिक योजना के अभाव को दर्शाती है.

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