
त्योहारी भीड़, अनरिजर्व सीटें... मुंबई के बांद्रा टर्मिनस पर कैसे मची भगदड़
AajTak
ये घटना रविवार सुबह करीब 2.45 बजे हुई, यात्री ट्रेन नंबर 22921 बांद्रा-गोरखपुर अंत्योदय एक्सप्रेस में सीट पाने के लिए दौड़ पड़े. ये यात्री जनरल टिकट वाले थे. 22 कोच वाली इस ट्रेन को सुबह 5.10 बजे रवाना होना था. अधिकारियों ने कहा कि त्योहारों के मौसम में यात्री अक्सर सीट पाने के लिए जद्दोजहद करते हैं.
मुंबई के भारी भीड़ वाले बांद्रा टर्मिनस पर रविवार को मची भगदड़ में करीब 10 लोग घायल हो गए. इनमें से 2 की हालत गंभीर बताई जा रही है. पुलिस और रेलवे अधिकारियों के अनुसार यात्रियों ने भीड़ के बीच चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की. इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में यात्री गोरखपुर जाने वाली ट्रेन में चढ़ने की जल्दी में दिखाई दे रहे हैं.
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों और स्थानीय यात्रियों ने घायलों को तुरंत भाभा अस्पताल पहुंचाया.
दरअसल, आगामी दिवाली और छठ त्योहारों के मद्देनजर अपने गृहनगर जाने वाले यात्रियों की भीड़ बांद्रा टर्मिनस पर एकत्र हो गई, इसके चलते वहां जाम के हालात बन गए. ये घटना तब हुई, जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आई और उसमें अनारक्षित टिकट वाले कई यात्री चढ़ने के लिए आपाधापी करने लगे.
ये घटना रविवार सुबह करीब 2.45 बजे हुई, यात्री ट्रेन नंबर 22921 बांद्रा-गोरखपुर अंत्योदय एक्सप्रेस में सीट पाने के लिए दौड़ पड़े. ये यात्री जनरल टिकट वाले थे. 22 कोच वाली इस ट्रेन को सुबह 5.10 बजे रवाना होना था. अधिकारियों ने कहा कि त्योहारों के मौसम में यात्री अक्सर सीट पाने के लिए जद्दोजहद करते हैं, क्योंकि ऐसी ट्रेनों में रिजर्वेशन उपलब्ध नहीं होता है.
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं, जिसमें यात्री भागते, चिल्लाते, कुछ घायल और खून से लथपथ दिखाई दे रहे हैं. एक वीडियो में, खून से लथपथ एक व्यक्ति को देखा जा सकता है, जबकि दूसरा घायल यात्री पास में पड़ा हुआ है. परेशान करने वाली बात ये है कि कोच के दरवाजे पर एक यात्री पड़ा हुआ है. उसके पैर में चोट है, इसके बावजदू लोग चढ़कर जा रहे थे.
इस घटना को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर निशाना साधा. आदित्य ठाकरे ने एक्स पर पोस्ट किया कि काश कि रील मंत्री एक बार रेल मंत्री होते. बांद्रा की घटना केवल यह दर्शाती है कि वर्तमान रेल मंत्री कितने अक्षम हैं. भाजपा ने चुनावों के लिए अश्विनी वैष्णव जी को भाजपा महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया है, लेकिन हर हफ्ते रेलवे के साथ कुछ घटनाएं और दुर्घटनाएं होती हैं. यह बहुत शर्म की बात है कि हमारे देश को ऐसे अक्षम मंत्रियों के अधीन रहना पड़ रहा है.

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा के मंदिर परिसरों में इस साल से मोबाइल फोन और कैमरों पर पूरी तरह से बैन रहेगा. दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद CAQM ने GRAP-4 लागू कर दिया है. ट्रकों की दिल्ली में एंट्री बंद कर दी गई है और स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने का निर्देश दिया गया है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे. प्रधानमंत्री की अगुवाई में US कॉन्सुलेट तक मार्च निकाला गया.

माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या आज मनाया जा रहा है. इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज के संगम स्थल पर एकत्र हुए हैं. ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे से स्नान आरंभ हो गया है जो दिन भर चलता रहेगा. स्थानीय प्रशासन ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु मौनी अमावस्या के स्नान के लिए संगम क्षेत्र में पहुंचेगे.

जोशीमठ क्षेत्र में जंगलों में लग रही आग का सिलसिला अब भी जारी है. फूलों की घाटी, थेंग गांव, तपोवन रेंज और नीति घाटी के जंगलों में तगड़ी आग भड़क चुकी है. खासकर जोशीमठ के सामने चाई गांव के जंगलों में भीषण आग लगातार फैल रही है. कई दिन से बारिश और बर्फबारी न होने की वजह से पहाड़ सूखे हुए हैं जिसका असर जंगलों पर पड़ रहा है.

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने साइबर ठगी के केस में कार्रवाई की है. मुंबई के रहने वाले 72 साल के बुजुर्ग से 58.13 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पहली किस्त के रूप में 2 करोड़ रुपये की राशि वापस कराई गई है. पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों की संपत्तियां फ्रीज की हैं, जबकि मुख्य आरोपी अब भी फरार है.

बागेश्वर के उत्तरायणी मेले में हिमालयी कुत्तों की खास बाजार लोगों का ध्यान खींच रही है. पहाड़ी इलाकों से आए व्यापारी हिमालयन शीपडॉग बेच रहे हैं, जिनकी कीमत 5,000 से 25,000 रुपये तक है. ये कुत्ते अपनी वफादारी और साहस के लिए जाने जाते हैं और जंगली जानवरों से भी मुकाबला करते हैं. पहले ग्रामीण इलाकों तक सीमित यह नस्ल अब शहरों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है.








