
तेलंगाना चुनाव: CM केसीआर बोले- भविष्य में क्षेत्रीय पार्टियों का युग आने वाला है
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राव ने सभा में मुसलमानों से कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने 2004 से 2014 के दौरान अल्पसंख्यकों के विकास पर केवल 900 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि बीआरएस सरकार ने पिछले साढ़े नौ साल के दौरान अल्पसंख्यकों के कल्याण पर 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए थे.
बीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने रविवार को कहा कि भविष्य में क्षेत्रीय पार्टियों का युग आने वाला है. राव ने खम्मम में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा ने राज्य के लिए ईमानदारी से काम नहीं किया. उन्होंने कहा कि लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि किसकी जीत तेलंगाना के लिए अच्छा संकेत है.
के चंद्रशेखर राव ने कहा, 'भाजपा, कांग्रेस, दो पार्टियां. क्या उन्होंने कभी तेलंगाना का झंडा उठाया? क्या उन्होंने कभी तेलंगाना संघर्ष को अपने कंधों पर लिया? जब भी हमने (तेलंगाना संघर्ष) शुरू किया, उन्होंने केवल हमारा अपमान किया, हम पर गोलियां चलाईं और हमें जेलों में डाल दिया." उन्हें (राज्य के प्रति) प्यार क्यों होगा.' उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस नेता दिल्ली में अपने आकाओं के इशारे पर काम करते हैं.
उन्होंने कहा, 'क्या हमें भी दिल्ली के इन गुलामों के अधीन रहकर गुलाम बनना चाहिए? मैं आज खम्मम में आपको बता रहा हूं. आप कहेंगे कि केसीआर ने कहा था और यह सच हो गया है. आने वाले दिनों में क्षेत्रीय पार्टियों का युग आ रहा है.' उन्होंने बीआरएस शासन के दौरान खम्मम शहर और राज्य में हुई प्रगति की चर्चा की.
राव ने सभा में मुसलमानों से कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने 2004 से 2014 के दौरान अल्पसंख्यकों के विकास पर केवल 900 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि बीआरएस सरकार ने पिछले साढ़े नौ साल के दौरान अल्पसंख्यकों के कल्याण पर 12,000 करोड़ रुपये खर्च किए थे.
उन्होंने कहा, 'आप इससे समझ सकते हैं कि प्रत्येक पार्टी कैसे काम करती है. आप जानते हैं कि आपको कैसे वोट बैंक बनाया गया और आपके मतदाताओं को कैसे लूटा गया और आपके साथ कैसे अन्याय किया गया.' उन्होंने कहा, बीआरएस सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहेगी. राव ने दोहराया कि जब तक वह जीवित हैं, तेलंगाना एक धर्मनिरपेक्ष राज्य बना रहेगा.
इससे पहले कोठागुडेम में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते हुए राव ने कहा कि लोगों को 30 नवंबर के विधानसभा चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग करने से पहले 2014 से उनके बीआरएस शासन और अविभाजित आंध्र प्रदेश में पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुई प्रगति की तुलना करनी चाहिए.

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