
'तुर्की के बिना कोई कॉरिडोर नहीं', एर्दोगन ने भारत को यूरोप से जोड़ने वाले प्रोजेक्ट का किया विरोध
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तुर्की के राष्ट्रपति के एर्दोगन ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर का विरोध किया है. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई देश ट्रेड कॉरिडोर बनाकर अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके साथ ही एर्दोगन ने कहा कि तुर्की के बिना कोई कॉरिडोर नहीं है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर (IMEEC) ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट का विरोध किया है. एर्दोगन ने कहा कि उन्हें पता है कि कई देश ट्रेड कॉरिडोर बनाकर अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं.
रेचेप तैय्यप एर्दोगन तुर्की वापस लौट चुके हैं और अब उनके सुर भी बदल गए हैं. भारत में जी20 समिट में उनके साथ मीडियाकर्मियों से बात करते हुए एर्दोगन ने सोमवार को कहा कि तुर्की के बिना कोई कोई कॉरिडोर नहीं है.
दरअसल भारत की अध्यक्षता में हुए जी20 शिखर सम्मेलन में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर (IMEEC) ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट की मंजूरी मिली है. यह कॉरिडोर भारत से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन और इज़राइल होते हुए ग्रीस और यूरोप तक पहुंचेगा. इस कॉरिडोर में तुर्की को बायपास किया गया है. इस समझौते पर यूरोपीय संघ, भारत, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका और जी20 के अन्य सदस्यों ने भी हस्ताक्षर किए थे.
तुर्की के बिना कोई कोई कॉरिडोर
एर्दोगन ने कहा, "हम कहते हैं कि तुर्की के बिना कोई कॉरिडोर नहीं है. तुर्की उत्पादन और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण देश है. पूर्व से पश्चिम तक यातायात के लिए सबसे सुविधाजनक लाइन तुर्की से होकर गुजरती है."
IMEEC प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य शिपिंग समय में 40 फीसदी की कटौती करना और अन्य लागतों, ईंधनों के उपयोग पर पैसे बचाना है. हालांकि ये प्रोजेक्ट तुर्की को दरकिनार कर देता है.

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