
तीर कमान की लड़ाई... उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर निकाय चुनाव के पहले सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना के चुनाव निशान तीर कमान को लेकर शीघ्र सुनवाई से इनकार कर दिया है. उद्धव ठाकरे गुट की ओर से महाराष्ट्र के निकाय चुनाव से पहले सुनवाई की मांग की थी.
शिवसेना के नाम और चुनाव निशान 'तीर कमान' को लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. चुनाव आयोग ने शिवसेना नाम और चुनाव निशान की लड़ाई में फैसला शिंदे गुट के पक्ष में सुनाया था. चुनाव आयोग के इस फैसले को उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उद्धव गुट ने सुप्रीम कोर्ट से इस याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई थी. सुप्रीम कोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका देते हुए याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई अर्जेंसी हुई तो ग्रीष्मावकाश में देखेंगे. शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले गुट ने भारतीय निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई गई थी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ के समक्ष उद्धव ठाकरे के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मंगलवार को ही इस पीठ ने महाराष्ट्र में 2023 से पहले की आरक्षण नीति के मुताबिक स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जाने का आदेश दिया है.
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में निकाय चुनाव को लेकर आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले पर भी तत्काल सुनवाई होनी चाहिए. उन्होंने अपनी मांग के पीछे यह दलील दी कि एकनाथ शिंदे गुट को पार्टी का चुनाव चिह्न मिला हुआ है. निर्वाचन आयोग के आदेश को हमने चुनौती दे रखी है. इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कपिल सिब्बल से पूछा कि तुरंत सुनवाई की क्या जरूरत है? यह स्थानीय निकाय चुनाव हैं. यह जरूरी नहीं है कि आप राजनीतिक प्रतीक (चुनाव चिह्न) पर ही चुनाव लड़ेंगे.
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जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें बताया गया था कि साल 2017 के बाद से ही नगरपालिका चुनाव नहीं हुए थे. आपके पास भी चुनाव चिह्न है. आप भी चुनाव में भाग लीजिए. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि शिवसेना का मूल चुनाव निशान तीर कमान लेकिन शिंदे गुट के पास है. जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर कहा कि चुनाव सुचारु रूप से होने दें. वैसे भी स्थानीय निकायों में ज्यादातर मतदाताओं के लिए चिन्ह का बहुत महत्व नहीं होता है.
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