
ताबड़तोड़ मिसाइल अटैक... परमाणु संयंत्र और यूरेनियम प्रोग्राम वाले ईरानी शहर को इजरायल ने बना दिया बदलापुर
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ईरान का इस्फहान स्ट्रैटेजिक रूप से काफी महत्वपूर्ण शहर है. यहां मिलिट्री रिसर्च और डेवलपमेंट साइट्स के साथ-साथ कई अहम बेस हैं. यह तेहरान और मशाद के बाद ईरान का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है. यहां की आबादी लगभग 22 लाख है. यहां इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का सैन्यअड्डा है. देश का सबसे बड़ा क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट भी इसी शहर में है.
इजरायल ने ईरान के हमले के ठीक एक हफ्ते बाद काउंटर अटैक किया है. इजरायल ने शुक्रवार तड़के ईरान के कई शहरों में मिसाइलें दागीं. लेकिन इस हमले का मुख्य केंद्र ईरानी शहर इस्फहान (Isfahan) है. इस शहर के न्यूक्लियर प्लांट और एयरपोर्ट को निशाना बनाकर हमला किया गया. लेकिन अहम सवाल ये है कि इजरायल ने 'बदले' के लिए इसी शहर को क्यों चुना?
ईरान का इस्फहान स्ट्रैटेजिक रूप से काफी महत्वपूर्ण शहर है. यहां मिलिट्री रिसर्च और डेवलपमेंट साइट्स के साथ-साथ कई अहम सैन्यअड्डे हैं. यह तेहरान और मशाद के बाद ईरान का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है. यहां की आबादी लगभग 22 लाख है.
इजरायल ने क्यों बनाया इस्फहान को निशाना?
ईरानी शहर इस्फहान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रमुख सैन्यअड्डा है. देश का सबसे बड़ा क्लाउड सीडिंग प्रोजेक्ट भी इसी शहर में है. इस शहर में कई न्यूक्लियर प्लांट हैं. ईरान का सबसे बड़ा यूरेनियम प्रोग्राम भी इसी जगह से ऑपरेट होता है.
इस्फहान में ईरानी सेना का प्रमुख एयरबेस भी है, जहां ईरान का सबसे बड़ा जहाजी बेड़ा है. यहां US मेड F-14 टॉमकैट लड़ाकू विमान है, जो उसे 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले अमेरिका से मिला था. इस लड़ाकू विमान की रफ्तार 2485 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसकी कॉम्बैट रेंज 930 किलोमीटर है और इसमें दस तरह के हथियार लगाए जा सकते हैं, जिसमें रॉकेट, बम और मिसाइलें शामिल हैं. ईरान कई अहम जंगों में इसका इस्तेमाल करता आया है. माना जा रहा है कि ईरान के एक महत्वपूर्ण शहर को निशाना बनाकर इजरायल एक बड़ा संदेश देना चाहता है कि वह ईरान की रीढ़ की हड्डी तोड़कर उसे कमजोर कर सकता है.
इजरायल के हमले पर ईरान का जवाब

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