
ताइवान का सवाल! अमेरिका और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच 7.30 घंटे तक होती रही बातचीत
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अमेरिका का कोई विदेश मंत्री पांच सालों के अंतराल के बाद चीन दौरे पर पहुंचा है. ब्लिंकन ने रविवार को चीन के विदेश मंत्री किन गांग के साथ साढ़े सात घंटे तक बातचीत की. इस दौरान ताइवान, व्यापार, मानवाधिकारों और फेंटानिल ड्रग जैसे विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई.
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरान वह बीजिंग में कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं. उम्मीद है कि वह अपनी यात्रा के अंतिम दिन सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात कर सकते हैं.
अमेरिका का कोई विदेश मंत्री पांच सालों के अंतराल के बाद चीन दौरे पर पहुंचा है. ब्लिंकन ने रविवार को चीन के विदेश मंत्री किन गांग के साथ साढ़े सात घंटे तक बातचीत की. इस दौरान ताइवान, व्यापार, मानवाधिकारों और फेंटानिल ड्रग जैसे विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई. लेकिन लगता है कि इन मुद्दों पर बातचीत किसी तरह के निर्णायक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई.
हालांकि, दोनों नेताओं ने जरूर स्थाई संबंधों की इच्छा जताई. इस कड़ी में इन संबंधों को नए स्तरों तक ले जाने के लिए चीन के विदेश मंत्री को अमेरिका आने का न्योता दिया गया. लेकिन अभी तक इसका ऐलान नहीं किया गया है.
ब्लिंकन सोमवार को चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी से भी मिल सकते हैं. लेकिन सभी की नजरें इस पर होंगी कि क्या ब्लिंकन की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से होती है या नहीं. सूत्रों का कहना है कि इस बात की उम्मीद है कि यह मुलाकात होगी लेकिन अभी तक विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि नहीं की है. दोनों पक्षों का कहना है कि रविवार को ब्लिंकन और किन गांग के बीच हुई बातचीत निर्णायक थी.
चीन का ताइवान ऑब्सेशन
चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक, ब्लिंकन के साथ बैठक में किन गांग ने बताया कि चीन के मूलभूत हितों में ताइवान का मुद्दा बहुत अहम है. इसके साथ ही चीन, अमेरिका संबंध भी अहम हैं. लेकिन हाल के सालों में दोनों देशों के संबंध बिगड़े हैं और इसकी वजह ताइवान है.

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