
डेटा ब्रीच की रिपोर्ट, SM पर लगाम, जानें-डेटा प्रोटेक्शन बिल पर JPC की बड़ी सिफारिशें
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यदि व्यक्तिगत डेटा उल्लंघन की रिपोर्टिंग में देरी के कारण डेटा प्रिंसिपल को नुकसान का सामना करना पड़ा है, तो यह साबित करना होगा कि देरी उचित थी. किसी भी व्यक्तिगत डेटा को उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए आवश्यक अवधि से ज्यादा समयत तक नहीं रखा जा सकेगा, आखिर में डेटा को हटाना होगा.
डेटा प्रोटेक्शन बिल पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट गुरुवार को राज्यसभा में पेश कर दी गई. अब भारत में डेटा प्रोटेक्शन कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है. जल्द ही सदन में कमेटी की रिपोर्ट पर बहस होगी. समिति ने सिफारिश की है कि सेक्शन 25(3) में डेटा उल्लंघन की रिपोर्टिंग के लिए 72 घंटे का समय दिया जाना चाहिए. समिति का यह भी कहना है कि डेटा उल्लंघन से निपटने के तरीके पर नियम बनाते समय डीपीए द्वारा पालन किए जाने वाले सिद्धांत होने चाहिए. समिति ने सिफारिश की है कि ऑथरिटी को सेक्शन 25(5) के तहत व्यक्तिगत डेटा ब्रीच की डिटेल पोस्ट करते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डेटा प्रिंसिपल की गोपनीयता सुरक्षित है.

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