
'ट्रेन लेट आई, खाना भी नहीं मिला,' इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने रेलवे से मांगा जवाब
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इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार ने रेलवे के जीएम को एक पत्र लिखा है. इसमें जज को असुविधा होने पर दोषी अफसरों से जवाब मांगे जाने का आदेश दिया है. पत्र में बताया कि जस्टिस जिस ट्रेन से नई दिल्ली से प्रयागराज आए, वो ट्रेन 3 घंटे से ज्यादा लेट थी. जज के कोच में जीआरपी कर्मी नहीं मिला. पेंट्रीकार कर्मचारी भी रिफ्रेशमेंट देने के लिए उपस्थित नहीं हुए.
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज ने ट्रेन में 'असुविधा' होने पर भारतीय रेलवे के अफसरों पर नाराजगी जताई है और उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को एक पत्र भेजा है. इस पत्र में पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया है और दोषी अफसरों से स्पष्टीकरण मांगे जाने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने पत्र में बताया कि जस्टिस गौतम चौधरी नई दिल्ली से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के लिए यात्रा कर रहे थे.
मामला 8 जुलाई का है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल आशीष कुमार श्रीवास्तव ने 14 जुलाई को एक पत्र जारी किया है. इसमें कहा गया है कि पुरुषोत्तम एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12802) के एसी-1 कोच में नई दिल्ली से जस्टिस चौधरी अपनी पत्नी के साथ प्रयागराज आ रहे थे.
'ना TTE ने सुना, ना पेंट्रीकार मैनेजर ने फोन उठाया'
ट्रेन तीन घंटे से ज्यादा लेट आई. टीटीई (यात्रा टिकट परीक्षक) को बार-बार सूचित किया गया, उसके बावजूद जज की मदद करने और जरूरत के लिए कोच में कोई जीआरपी कर्मी नहीं मिला. इसके अलावा, बार-बार कॉल करने के बावजूद पैंट्री कार कर्मचारी ने ध्यान नहीं दिया और जस्टिस परिवार को ना खाने के लिए कुछ उपलब्ध कराया और ना उनकी देखभाल की गई. इस पर जस्टिस ने पेंट्रीकार मैनेजर राज त्रिपाठी को फोन किया, लेकिन उन्होंने भी कॉल रिसीव नहीं की.
'दोषियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने के आदेश'

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