
ट्रंप टैरिफ की काट निकालने की कोशिश में चीन, शुरू हुई CPC की अहम बैठक, इन मुद्दों पर भी फोकस
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चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक शुरू की, जिसमें अमेरिका के साथ व्यापार तनाव के कारण आर्थिक मंदी और सैन्य अधिकारियों में बदलाव के बीच एक नई पंचवर्षीय योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा.
चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार (20 अक्तूबर) को एक महत्वपूर्ण बैठक की शुरुआत कर दी है, जिसमें अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के कारण आर्थिक मंदी और सैन्य कामकाज की चिंताओं के बीच एक नई पंचवर्षीय योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा. ये बैठक तीन दिन तक चलेगी. इस बैठक को खास माना जा रहा है क्योंकि चीन और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है, जो खासकर व्यापार और रणनीतिक मामलों से जुड़ा है.
नई सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, चीन की अर्थव्यवस्था में इस साल सबसे धीमी वृद्धि दर्ज की गई है, जो सिर्फ 4.8% है. पिछली तिमाही में यह 5.2% थी. इस गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ माने जा रहे हैं, जिससे चीन का अमेरिका को निर्यात प्रभावित हुआ है. इसका असर रोजगार पर भी पड़ रहा है. खासकर युवाओं में बेरोजगारी 20% तक पहुंच गई है.
इस बैठक में 15वीं पंचवर्षीय योजना को लेकर चर्चा हो रही है. इसका मकसद आर्थिक मंदी से निपटना, नए रोजगार बनाना और घरेलू खपत बढ़ाना है. चीन इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य उद्योगों में अतिरिक्त उत्पादन की समस्या का भी हल खोजने की कोशिश करेगा.
बैठक से पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं. उन्होंने सेना के दो टॉप जनरल — He Weidong और Miao Hua समेत सात अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है. इन पर भ्रष्टाचार और अनुशासन तोड़ने के आरोप हैं. अब उनकी जगह नए सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी.
तीन दिन चलने वाली इस बैठक में अमेरिका के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा, खासकर ट्रंप की नीतियों पर भी चर्चा की जा रही है. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में शी जिनपिंग और ट्रंप आमने-सामने मिलेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच नए व्यापार समझौते की दिशा तय हो सकती है.
हाल ही में SCO शिखर सम्मेलन 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोद और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी हिस्सा लिया था. इस दौरान मोदी और शी जिनपिंग के बीच लंबी बातचीत हुई. यह बातचीत दोनों देशों के बीच रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है. चीन भी अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने, सेना में सख्ती लाने और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव से निपटने की तैयारी में है. यह बैठक आने वाले समय में चीन की नीतियों को दिशा देगी.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

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