
ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केसः कार्बन डेटिंग से कैसे पता चलेगी 'शिवलिंग' की उम्र, क्या ये संभव है?
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ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे के दौरान मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की जाए या नहीं? इस पर वाराणसी की जिला अदालत आज फैसला सुनाएगी. फैसला दोपहर 2 बजे के बाद आ सकता है. कार्बन डेटिंग की मांग इसलिए हो रही है, ताकि कथित शिवलिंग की सही उम्र का पता लगाया जा सके.
ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मिले 'शिवलिंग' की उम्र का पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग कराई जाए या नहीं? इसपर आज वाराणसी कोर्ट का फैसला आना है. फैसला 2 बजे के बाद आ सकता है.
पर कोर्ट के फैसले से पहले सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या पत्थर या लोहे की उम्र का पता लगाया जा सकता है और अगर लगाया जा सकता है तो कैसे? जिस कार्बन डेटिंग पद्धति से दावे वाले शिवलिंग की उम्र का पता लगाने की याचिका डाली गई है क्या है उसकी पूरी प्रक्रिया, कैसे इस टेक्नीक से ऐतिहासिक धरोहरों की उम्र का पता लगाया जाता है. इन सब सवालों का जवाब हम देंगे.
सबसे पहले क्या है पूरा मामला?
- पिछले साल 18 अगस्त को पांच महिलाओं ने वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिविजन) के सामने एक वाद दायर किया था. इसमें उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद के बगल में बने श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना पूजा और दर्शन करने की अनुमति देने की मांग की थी.
- महिलाओं की याचिका पर जज रवि कुमार दिवाकर ने मस्जिद परिसर का सर्वे कराने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश पर इसी साल 14, 15 और 16 मई को सर्वे किया गया.
- सर्वे के बाद हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने यहां शिवलिंग मिलने का दावा किया था. उन्होंने दावा किया था कि मस्जिद के वजूखाने में शिवलिंग है. हालांकि, मुस्लिम पक्ष का कहना था कि वो शिवलिंग नहीं, बल्कि फव्वारा है जो हर मस्जिद में होता है.

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