
जम्मू-कश्मीर में चुनाव का ऐलान कब? इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहा चुनाव आयोग
AajTak
निर्वाचन आयोग की टीम का दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर दौरा पूरा हो गया है. आयोग के दौरे के बाद अब विधानसभा चुनाव कार्यक्रम को घोषणा के लिए सुरक्षा रिव्यू रिपोर्ट का इंतजार है. उम्मीद लगाई जा रही है कि इस रिपोर्ट के बाद आयोग विधानसभा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर सकता है.
निर्वाचन आयोग ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं. चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने जम्मू-कश्मीर पहुंची निर्वाचन आयोग की टीम का दो दिवसीय दौरा पूरा हो गया है. अपने इस दौरे के दौरान आयोग की टीम ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ सेना और अर्धसैनिक बलों के आला अधिकारियों के साथ सुरक्षा को लेकर चर्चा की.
आयोग के दौरे के बाद अब विधानसभा चुनाव कार्यक्रम को घोषणा के लिए सुरक्षा रिव्यू रिपोर्ट का इंतजार है.आंतरिक सुरक्षा संभालने वाली एजेंसियों, सुरक्षाबलों के आला अधिकारी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा समीक्षा करने के बाद तय किया जाएगा कि विधानसभा चुनाव कब और कैसे होंगे.
वहीं, कश्मीर घाटी और जम्मू संभाग में सुरक्षा और अन्य नजरिए से राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कोई भी अंदरूनी ताकत या बाहरी ताकत अगर दखलंदाजी कर के ये सोचते हैं कि वह चुनाव को टाल सकते हैं तो मैं उन्हें साफ कहना चाहता हूं कि वह ऐसा नहीं कर सकते.
उन्होंने अपने शायराना अंदाज में कहा कि जम्हूरियत का सफर गोया हूं ही चलता रहे, लंबी कतारों में चमकती आंखों का नूर यूं ही कायम रहे, हर चेहरा उम्मीदों से यूं ही रोशन रहे, वोट की ताकत यूं ही हिंसा के नापाक इरादों को शिकस्त देते रहे.
राजीव कुमार ने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर में जल्द से जल्द चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, हमें विश्वास है कि लोग किसी भी विघटनकारी ताकतों का मजबूती से जवाब देंगे और चुनाव होने पर अपनी भागीदारी बढ़ाएंगे. चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एस एस संधू के साथ सीईसी ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव के लिए सही समय है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि हम संसदीय चुनावों की सफलताओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं. हम सबसे पहले नई दिल्ली में सुरक्षा बलों की उपलब्धता की समीक्षा करेंगे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की 30 सितंबर की समयसीमा को ध्यान में रखा जाएगा. हम आपको चुनाव की समय सीमा के बारे में सूचित करते रहेंगे.

जिस समय दुनिया में भारत में चल रही AI समिट की वाहवाही हो रही थी. दुनिया के तमाम देशों के राष्ट्रप्रमुख भारत की क्षमताओं और लीडरशिप के कायल हो रहे थे. तब कांग्रेस की यूथ विंग का 'राजनीतिक विरोध'... कुंठा और हताशा की सारी सीमाओं को पार कर गया और फिर उन्होंने जो किया, उसे शर्मनाक, फूहड़ता, निर्लज्जता और 'राजनीतिक अधोपतन' ही कहा जा सकता है. कांग्रेस की यूथ विंग के कार्यकर्ताओं ने किसी पूर्व नियोजित योजना के तहत सुरक्षा घेरा तोड़कर AI समिट में प्रवेश किया.

आज की घटना में यूथ कांग्रेस के नेताओं ने मोदी विरोध में अपने कपड़े उतारकर AI Impact Summit में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर शर्मिंदा किया. इस प्रकार के विरोध को राजनीति नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह देश के सम्मान के खिलाफ है. युवा नेताओं की इस हरकत ने देश की छवि को प्रभावित किया है. राजनीतिक विरोध करना अपनी बात सामने रखने का तरीका होता है लेकिन इस तरह के प्रदर्शन से देश के हितों को नुकसान होता है.

यह वीडियो कांग्रेस द्वारा AI समिट में किए गए विरोध प्रदर्शन पर केंद्रित है. दिल्ली पुलिस इस मामले में जांच कर रही है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. विपक्ष के विरोध ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह विरोध राजनीतिक साजिश के तहत किया गया है. इस दौरान यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे और प्रदेश की सकारात्मक विकास खबरों पर भी चर्चा की गई है. देखें खबरदार.

एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आयोजन स्थल के भीतर विरोध प्रदर्शन किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए गए और टी-शर्ट्स पर संदेश लिखे गए. समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और कई वैश्विक कंपनियों के प्रमुख मौजूद थे. विरोध के समय और तरीके को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है.

'नफरत की राजनीति से सामाजिक ताना-बाना प्रभावित', कश्मीरी छात्रों पर हमलों की राहुल गांधी ने की निंदा
राहुल गांधी ने कश्मीरी छात्रों और शॉल विक्रेताओं पर बढ़ते हमलों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के संयोजक नासिर खुएहामी को पत्र लिखकर अपनी चिंता जताई. राहुल गांधी ने कहा कि नफरत की राजनीति ने देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न बढ़ा है.

रमजान के महीने में देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं सामने आई हैं. खासकर मध्यप्रदेश के जबलपुर, हैदराबाद और कर्नाटक के बागलकोट में हालात तनावपूर्ण रहे. जबलपुर के सिहोरा इलाके में मंदिर और मस्जिद के बीच आरती और नमाज के समय विवाद हुआ जिसने तोड़फोड़ और पथराव को जन्म दिया. पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए कार्रवाई कर रही है.

उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के श्रीनगर में स्थित लोकप्रिय धारी देवी मंदिर के पास बहने वाली अलकनंदा नदी में बड़ा हादसा टल गया. नदी में दो बोटों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हुई जिसके कारण कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई. टक्कर के बाद एक चालक नदी में गिर गया जबकि दूसरी बोट अनियंत्रित होकर बीच धारा में घूमती रही. सौभाग्यवश चालक तैरकर सुरक्षित बाहर आ गया और बोट संचालकों की सूझबूझ से सभी सवार सुरक्षित बचा लिए गए.

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने इस इंटरव्यू ब्रिक्स करेंसी पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि हमने यह नहीं कहा कि हम ब्रिक्स करेंसी बनाएंगे. ब्रिक्स के अंदर नई करेंसी बनाने पर कोई बहस नहीं है. लेकिन यह जरूरी नहीं है कि ब्राजील और इंडिया के बीच ट्रेड डील US डॉलर में ही हो. हम इसे अपनी करेंसी में भी कर सकते हैं.





