
जम्मू-कश्मीर: परिवारवाद के खिलाफ प्रचंड लहर, चुनाव हारे पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती
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जम्मू-कश्मीर में हुए इस चुनाव में जनता ने परिवारवाद पर चोट किया है. चुनाव में राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है.
इस लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर में परिवारवाद के खिलाफ प्रचंड लहर चली. अनुच्छेद 370 के खत्म होने के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में प्रदेश की दो प्रमुख पॉलिटिकल फैमिली के मुखिया को हार का सामना करना पड़ा है. इस चुनाव में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को शिकस्त का सामना करना पड़ा है. मंगलवार आए जनादेश में ये दोनों नेता लाखों वोटों के फासले से हारे हैं.
इस चुनाव में नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में जम्मू-कश्मीर परिवारवादी पार्टियों के वर्चस्व का मसला उठाया था. नरेंद्र मोदी ने फरवरी में कहा था कि उनकी प्राथमिकता होगी कि जम्मू-कश्मीर में परिवारवाद की जगह विकास को तरजीह मिले. कार्यवाहक पीएम मोदी ने जम्मू में एक कार्यक्रम में कहा था कि जो सरकारें सिर्फ अपनी परिवारों के लिए चिंतित रहती है उन्हें राज्य के युवाओं की चिंता कैसे होगी.
नरेंद्र मोदी की इस अपील का असर मतदाताओं पर देखने को मिला है.
जम्मू-कश्मीर की बारामूला सीट पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और दिल्ली तक की राजनीति में दखल रखने वाले उमर अब्दुल्ला को वोटरों का करारा जवाब मिला है. इस सीट पर उमर अब्दुल्ला को 2 लाख 4 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा है. उमर अब्दुल्ला को शिकस्त दी है जेल से चुनाव लड़ रहे निर्दलीय उम्मीदवार राशिद इंजीनियर ने.
राशिद इंजीनियर टेरर फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में इस वक्त जेल में है.
इसके अलावा इसी सीट पर जम्मू-कश्मीर के कद्दावर नेता सज्जाद गनी लोन को भी हार का सामना करना पड़ा है. उन्हें 2 लाख 99 हजार से हार का सामना करना पड़ा.

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