
छुट्टा नहीं है, बदले में थमाते थे टॉफी... अब UPI की वजह से धंधा मंदा, संकट में कैंडी इंडस्ट्रीज!
AajTak
कोरोना महामारी के दौरान यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ा और इसके साथ ही कैंडीज का कारोबार प्रभावित होना शुरू हो गया. क्रेड और डंजो में ग्रोथ लीडर साथ ही ग्रोथएक्स के संस्थापक अभिषेक पाटिल ने कहा कि यूपीआई के आने के बाद छुट्टे की गुंजाइश नहीं बची है.
यूपीआई (UPI) ने हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल को बेहद आसान बना दिया है. दुकान पर सामान खरीदने के बाद अब छुट्टे (Chutta) पैसे लेने और देने दोनों का ही झंझट ही खत्म हो गया है. लेकिन क्या आपको याद है कि एक या दो रुपये छुट्टे नहीं होने पर दुकानदार आपके हाथों टॉफी थमा देता था. एक समय ऐसा था कि दुकानों पर एक-दो रुपये के छुट्टे का मतलब ही कैंडी हो गया था. लेकिन यूपीआई ने आकर छुट्टे और कैंडी की आदला-बदली के कारोबार प्रभावित किया है.
कोरोना महामारी का असर
कोरोना महामारी के दौरान यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ा और इसके साथ ही कैंडीज का कारोबार प्रभावित होना शुरू हो गया. क्रेड और डंजो में ग्रोथ लीडर साथ ही ग्रोथएक्स के संस्थापक अभिषेक पाटिल ने कहा कि यूपीआई के साथ छुट्टे की गुंजाइश नहीं बची है. पाटिल ने सोशल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन पर एक पोस्ट में यूपीआई और कैंडी के बिजनेस (Candy Business) को लेकर कुछ आंकड़ों के जरिए अपनी बात कही.
2020 में दर्ज की गई गिरावट
उन्होंने कहा कि साल 2010 में मोंडेलेज, नेस्ले, पार्ले, आईटीसी, मार्स सहित सभी बड़ी कैंडी बनाने वाली कंपनियों ने चौंका देने वाला मुनाफा दर्ज किया था. अब अगर 2020 की बात करें, तो इनमें से अधिकतर ब्रांड्स के टॉफियों की बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिली है. दुनिया के सबसे बड़े टॉफी और चॉकलेट मेकर में से एक हर्शे ने यहां तक कहा कि भारत महामारी के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित बाजारों में से एक था. इस वजह से उसकी विस्तार योजना पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे.
खत्म होने वाली है ये स्कीम

इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ सबसे बड़ी चुनौती उन्हें चार्ज करने की होती है. रेंज एंजायटी जैसे शब्द इसी चिंता से निकले हैं, जहां लोगों को ये डर सताता रहता है कि जाने कब उनकी कार बंद हो जाए और उसे चार्ज कहां करेंगे. इसका निदान चीनी कंपनियां तेजी से खोज रही हैं. एक चीनी कंपनी ने सिर्फ 11 मिनट में फुल चार्ज होने वाली सोडियम-आयन बैटरी तैयार की है.












