
चुनावी जंग से पहले अंदरखाने की लड़ाई... NDA और INDIA ब्लॉक के सामने सीट शेयरिंग बड़ी चुनौती, जानें- कहां फंसा पेच?
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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वोटर अधिकार यात्रा के जरिए कांग्रेस ने महागठबंधन में जिस तरह अपनी ताकत का एहसास कराया है, संभव है कि तेजस्वी अब मंगलवार से शुरू हो रही बिहार अधिकार यात्रा के जरिए यह मैसेज देना चाहें कि बिहार में बड़े भाई की भूमिका आरजेडी की है. सबसे बड़ा जनाधार भी उन्हीं के पास है.
बिहार विधानसभा चुनाव के ऐलान में ज्यादा वक्त नहीं है. लेकिन चुनावी मैदान में उतरने के लिए कमर कस चुके दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर अबतक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. बात एनडीए की करें या फिर महागठबंधन की, दोनों खेमों का हाल एक जैसा ही नजर आ रहा है. एनडीए में सीट बंटवारे से पहले एक तरफ जहां छोटे घटक दलों के बीच खींचतान दिख रही है, तो वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन में वोटर अधिकार यात्रा के बाद आरजेडी और कांग्रेस अपने-अपने सिंगल प्लान को एक्टीवेट कर आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं. एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर अबतक बैठकों का दौर भी शुरू नहीं हुआ है, जबकि महागठबंधन के घटक दलों के बीच बैठकें तो हो रही हैं लेकिन कोई फॉर्मूला सामने नहीं आ पा रहा.
एनडीए में कहां फंसा है पेच?
सबसे पहले बात एनडीए गठबंधन की. एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे, इसे लेकर तस्वीर साफ है. चुनावी तैयारी को लेकर एनडीए का विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलनों का दौर भी जारी है. एनडीए के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि चुनावी बिगुल बजने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलग-अलग कार्यक्रमों से बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं में जोश भी भर रहा है. लेकिन बात अगर सीट शेयरिंग को लेकर करें तो अबतक एनडीए में घटक दलों के बीच बैठकों का दौर भी शुरू नहीं हो पाया है.
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एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर जिस फॉर्मूले की चर्चा सियासी गलियारे में है उसके मुताबिक बीजेपी और जेडीयू के बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है. चर्चा ये भी है कि ये दोनों बड़े घटक दल सौ-सौ से ज्यादा सीटों पर अपना उम्मीदवार देंगे. एनडीए में शामिल चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी को भी उनकी ताकत के हिसाब से सीटें दिए जाने की चर्चा है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा सीट बंटवारे पर अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं हैं. लेकिन चिराग पासवान की पार्टी ने शुरुआती दौर में 40 सीटों पर दावेदारी की थी.
क्या चाहते हैं चिराग पासवान?

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