
'चुनावी अभियान खत्म करने का समय... ', अमेरिकी राष्ट्रपति पद की रेस से बाहर हुईं निक्की हेली, ट्रंप को दिया ये मैसेज
AajTak
निक्की हेली ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होने की घोषणा करते हुए कहा कि अब मेरे चुनावी अभियान को खत्म करने का समय आ गया है. मैंने कहा था कि मैं चाहती हूं कि अमेरिकियों की आवाज सुनी जाए. मैंने ऐसा किया है.
अमेरिका में इस साल नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के चुनाव चल रहे हैं. इसी बीच निक्की हेली ने रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए नॉमिनेशन की रेस से खुद को अलग कर लिया है. अब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी की ओर से एकमात्र उम्मीदवार रह गए हैं.
निक्की हेली ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर होने की घोषणा करते हुए कहा कि अब मेरे चुनावी अभियान को खत्म करने का समय आ गया है. मैंने कहा था कि मैं चाहती हूं कि अमेरिकियों की आवाज सुनी जाए. मैंने ऐसा किया है. इसके लिए मुझे कोई भी पछतावा नहीं है. हालांकि कहा जा रहा है कि निक्की हेली ने सुपर ट्यूसडे के मुकाबलों में वर्मोंट को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में मिली हार के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ से बाहर होने का फैसला लिया है.
यह भी पढ़ें: निक्की हेली ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दी मात, रिपब्लिकन प्राइमरी जीतने वाली पहली महिला बनीं
निक्की ने अपने संबोधन के दौरान ट्रम्प का समर्थन करने से इनकार कर दिया. हालांकि उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से रिपब्लिकन और निर्दलीयों का समर्थन लेने का आग्रह किया, जिन्होंने पहले उनका समर्थन किया था. निक्की ने कहा कि अब यह डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर है कि वे हमारी पार्टी और उससे बाहर के लोगों के वोट हासिल करें, और मुझे आशा है कि वह ऐसा करेंगे.
बता दें कि सुपर ट्यूसडे के चुनाव परिणामों के बाद 77 वर्षीय डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिनिधि संख्या में अपनी एकमात्र रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी निक्की हेली पर मजबूत बढ़त बनाई थी. ट्रंप ने टेक्सास, कैलिफोर्निया और 11 अन्य राज्यों में जीत हासिल की थी, हालांकि निक्की हेली ने सिर्फ वर्मोंट में जीत हासिल की थी.
यह भी पढ़ें: 'हम पर भरोसा नहीं...', रूस और भारत की करीबी पर बोलीं निक्की हेली

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान को एक तकनीकी खराबी की वजह से वापस वाशिंगटन लौट आया. विमान को ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में सुरक्षित उतारा गया. ट्रंप के एयर फोर्स वन विमान में तकनीकि खराबी की वजह से ऐसा करना पड़ा. विमान के चालक दल ने उड़ान भरने के तुरंत बाद उसमें एक मामूली बिजली खराबी की पहचान की थी. राष्ट्रपति ट्रंप वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक में शिरकत करने के लिए स्विट्ज़रलैंड के दावोस जा रहे थे.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.







