
चीन की कमजोरी, समंदर में भारत की ताकत... छोटा सा मालदीव क्यों है हिंदुस्तान के लिए अहम?
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मालदीव को सबसे खास बनाती है उसकी भौगोलिक स्थिति. हिंद महासागर में 90 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला मालदीव रणनीतिक लिहाज से काफी खास है. भारत ही उसका सबसे करीबी पड़ोसी है. लेकिन वहां सरकार बदलने के बाद अब उसके भारत से दूर जाने की आशंका भी होने लगी है.
मालदीव में सरकार बदल चुकी है. मोहम्मद मुइज्जू ने 17 नवंबर को राष्ट्रपति पद की शपथ ली. मुइज्जू के शपथ समारोह में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पहुंचे थे. जबकि, पांच साल पहले 2018 में जब इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने शपथ ली थी, तब उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे.
बहरहाल, मुइज्जू का राष्ट्रपति बनना भारत के लिए थोड़ी चिंता भी बढ़ा सकता है. उसकी वजह भी है. मुइज्जू ने अपना पूरा चुनाव 'इंडिया आउट' कैंपेन पर लड़ा था. दरअसल, मुइज्जू मालदीव से भारतीय सैनिकों को हटाना चाहते हैं.
राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने फिर यही बात दोहराई. उन्होंने किरेन रिजिजू से मुलाकात के दौरान मालदीव से भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने की बात कही.
इतना ही नहीं, मुइज्जू की सरकार ने भारत के साथ हुए 100 से ज्यादा समझौतों की समीक्षा करने का भी फैसला लिया है.
मुइज्जू को चीन का समर्थक माना जाता है. हालांकि, मुइज्जू खुद को किसी देश का समर्थक बताते नहीं हैं. चीन समर्थक' सवाल पर मुइज्जू ने कहा था, 'मेरी सबसे पहली प्राथमिकता मालदीव और उसकी स्थिति है. हम मालदीव समर्थक हैं. कोई भी देश जो हमारी प्रो-मालदीव नीति का सम्मान करता है और उसका पालन करता है, वो मालदीव का करीबी दोस्त माना जा सकता है.'
मुइज्जू से पहले इब्राहिम मोहम्मद सोलिह राष्ट्रपति थे. सोलिह की सरकार में भारत और मालदीव के रिश्ते और भी ज्यादा मजबूत हुए थे. उन्हें चीन का विरोधी माना जाता था.

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