
घुट रही सांस, राहत की नहीं आस... दिल्ली-NCR के आसमान में क्यों टिक गया जहरीला स्मॉग?
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दिल्ली-एनसीआर में कमजोर हवाओं ने पॉल्यूशन को फंसा दिया, जिससे रविवार को एक्यूआई 366 (बहुत खराब) पहुंच गया. पीएम2.5 189.6 और पीएम10 316 पर पहुंच गया. इससे सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों-दिल की बीमारियां, अस्थमा बढ़ने का खतरा बढ़ गया है. बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. 4 नवंबर तक राहत नहीं.
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों (NCR) में हवा फिर जहरीली हो गई है. रविवार को हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 366 तक पहुंच गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है. लोग सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं, खासकर बच्चे, बूढ़े और फेफड़ों या दिल के मरीज. लेकिन सवाल यह है कि आखिर क्यों इस जहरीली हवा से कोई राहत नहीं मिल रही? इससे सेहत को क्या-क्या खतरा हो सकता है?
दिल्ली की हवा में जहर फैलाने वाले मुख्य दोषी हैं पीएम2.5 और पीएम10 नाम के कण. पीएम2.5 वे बहुत बारीक कण हैं, जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर से छोटा होता है. ये इतने छोटे होते हैं कि आसानी से फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं. वहीं, पीएम10 के कण थोड़े बड़े (10 माइक्रोमीटर तक) होते हैं. रविवार को पीएम2.5 की मात्रा 189.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी, जो सामान्य से कहीं ज्यादा है. पीएम10 316 पर पहुंच गया.
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, एक दिन पहले एक्यूआई 303 था, जो रविवार को तेजी से 366 हो गया. इसका मुख्य कारण? कमजोर हवाएं! हवा की गति 8 किलोमीटर प्रति घंटे से नीचे आ गई, जो उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही थी.
इससे प्रदूषक कण हवा में फंस गए और फैल नहीं पाए. दिल्ली के एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (AQEWS) ने बताया कि जब हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम हो और वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे हो, तो प्रदूषण फैलना मुश्किल हो जाता है. वो एक ही जगह रुक जाता है.

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