
गोरखपुर कांड में पुलिस की नीयत पर सवाल! मनीष की पत्नी ने गिनाए 6 नाम, FIR में लिखे 3 'अज्ञात'
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मनीष गुप्ता हत्याकांड में पहले दिन से ही आरोपी पुलिसवालों को बचाने की कोशिश की जा रही है. गोरखपुर के डीएम, एसएसपी हों या फिर सूबे के एडीजी सभी ने अपने अपने तरीके से मामले को नया मोड़ देने की कोशिश की, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और हत्याकांड के दो चश्मदीद गवाहों ने पुलिस की करतूत को उजागर कर दिया.
गोरखपुर के मनीष गुप्ता हत्याकांड ने यूपी पुलिस के वर्दी पर जो दाग लगाया है, वो गहरा होता जा रहा है. इस मामले में पुलिस ने योगी सरकार की खूब किरकिरी कराई है. इसके बाद खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की. उन्हें इंसाफ दिलाने का भरोसा दिया. आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही. लेकिन इतना सब होने के बाद भी गोरखपुर पुलिस ने अभी तक मनीष मर्डर केस की एफआईआर में सभी आरोपियों के नाम दर्ज नहीं किए हैं. उधर, एसएसपी का कहना है कि जो तहरीर में लिखा था, वैसे ही FIR दर्ज की गई है. नामजद आरोपी फरार हैं.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

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