
गाजा पर इजरायल का दोहरा अटैक... एयरस्ट्राइक में दो इमारतें ध्वस्त, बड़े पैमाने पर जमीनी हमला भी शुरू
AajTak
स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक इस हमले में दर्जनों लोगों की मौत हुई जबकि कई घायल हुए हैं. उधर, इजरायल का कहना है कि वह नागरिकों को निशाना नहीं बनाता. हमलों का मकसद हमास के आतंकियों का खात्मा करना और अभी भी उनके कब्जे में मौजूद बंधकों को छुड़ाना है. इजरायली सेना ने गाजा सिटी में लंबे समय से प्रतीक्षित जमीनी अभियान की शुरुआत की घोषणा भी कर दी.
इजरायल ने एक बार फिर गाजा को निशाना बनाया है. मंगलवार रात (स्थानीय समयानुसार) इजरायल ने गाजा सिटी पर हवाई हमले किए, जिसमें दो इमारतों को पूरी तरह ध्वस्त हो गईं. चश्मदीदों और स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक इस हमले में दर्जनों लोगों की मौत हुई जबकि कई घायल हुए हैं. सुबह होते ही राहतकर्मी और स्थानीय लोग मलबे में दबे शवों और घायलों को बाहर निकालने में जुट गए.
उधर, इजरायल का कहना है कि वह नागरिकों को निशाना नहीं बनाता. हमलों का मकसद हमास के आतंकियों का खात्मा करना और अभी भी उनके कब्जे में मौजूद बंधकों को छुड़ाना है. इजरायली सेना ने मंगलवार को गाजा सिटी में लंबे समय से प्रतीक्षित जमीनी अभियान की शुरुआत की घोषणा भी कर दी.
एक इजरायली सैन्य अधिकारी ने पुष्टि की कि गाजा पट्टी के सबसे बड़े शहरी केंद्र गाजा सिटी में जमीनी ऑपरेशन का मुख्य चरण शुरू हो चुका है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले दो दिनों से शहर पर बमबारी बेहद तेज हो गई है. लगातार भीषण धमाकों में दर्जनों घर तबाह हो चुके हैं. टैंकों और विमानों के साथ-साथ नौसैनिक पोतों ने भी तटीय इलाके पर गोलाबारी तेज़ कर दी है. इजरायल ने यहां रह रहे लाखों नागरिकों को पहले ही इलाके खाली करने का आदेश दिया था.
गाजा प्राधिकरण का दावा है कि अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुई लगभग दो साल लंबी इज़रायली सैन्य कार्रवाई में अब तक 64,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, इज़रायल के मुताबिक उस हमले में 1,200 लोग मारे गए थे और 251 अन्य को हमास ने बंधक बना लिया था.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.

आज यु्द्ध का 24वां दिन है. इजरायल पर ईरान और जवाब में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर ताबड़तोड़ हमले जारी हैं. इस बीच सवाल ये कि क्या डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज पर फंस गए हैं. ट्रंप के बार-बार बदलते बयानों से लग रहा है कि जंग छेड़ने से पहले हॉर्मुज को लेकर ट्रंप सोच नहीं पाए थे. देखें कैसे बदलते जा रहे ट्रंप के बयान.









