
'गलत वक्त पर गलत जगह फंस गए...', अमेरिकी अटैक में ईरानी जहाज के डूबने पर बोले जयशंकर
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हिंद महासागर में अमेरिकी टॉरपीडो हमले का शिकार हुए ईरानी जहाज 'आईरिस डेना' को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का रुख साफ किया है .रायसीना डायलॉग के दौरान उन्होंने बताया कि मानवीय आधार पर भारत ने क्षतिग्रस्त जहाज को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति क्यों दी.
रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी जहाज 'आइरिस डेना' (IRIS Dena) पर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो हमले के मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि भारत UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता है, लेकिन मानवीय आधार पर ईरान के जहाज को शरण देने का फैसला सही था, लेकिन वह गलत वक्त पर गलत जगह फंस गए. साथ ही उन्होंने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक जटिलताओं को समझते हुए भारत की जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया. जयशंकर ने डायलॉग में बोलते हुए कहा, 'ईरान की ओर से संदेश मिला था कि एक जहाज, जो उस वक्त भारत की सीमाओं के सबसे निकट था, बंदरगाह में आने की इच्छा जता रहा था. जहाज में तकनीकी समस्या थी. एक मार्च को भारत ने अनुमति दी और कुछ दिनों बाद जहाज कोच्चि में डॉक हो गया. इस जहाज पर कई युवा कैडेट सवार थे.'
'हमने सही कदम उठाया' उन्होंने स्पष्ट किया कि जब जहाज यहां से रवाना हुए थे और जब वो यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी. वो लोग अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे और फिर वो किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए. अन्य जहाजों में से एक की श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी, जहां बदकिस्मती से जहाज को नहीं बचाया जा सका. जयशंकर ने कहा कि हमने स्थिति को मानवता के नजरिए से देखा और मुझे विश्वास है कि हमने सही कदम उठाया है.
इस लिए हुआ हंबनटोटा का विकास सोशल मीडिया पर जारी बहसों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक हकीकत को समझने की सलाह दी. उन्होंने याद दिलाया कि डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिंद महासागर में मौजूद है. इसी तरह इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में जिबूती में विदेशी ताकतों के ठिकाने बने और इसी दौरान हंबनटोटा का विकास हुआ. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत क्षेत्र की जटिलताओं को समझते हुए अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है.
हमले में 80 से ज्यादा लोगों की मौत बता दें कि 4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर गाले के पास इंटरनेशनल जलक्षेत्र में अमेरिका की पनडुब्बी से दागे गए एक टॉरपीडो से ईरानी फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना को निशाना बनाया था. इस हमले के कारण जहाज डूब गया. इस हादसे में 80 से 87 लोगों के मारे जाने की खबरें हैं. श्रीलंकाई अधिकारियों ने 87 शव बरामद किए, जबकि 32 सवारों को जीवित बचा लिया गया और चिकित्सा उपचार के लिए गाले ले जाया गया. अभी भी दर्जनों लोग लापता हैं.
अमेरिका ने की हमले की पुष्टि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेग ने वाशिंगटन में इस हमले की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'एक अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया जो अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था. लेकिन उसे एक टॉरपीडो से डुबो दिया गया.' उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ये पहली बार था जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने टॉरपीडो का इस्तेमाल करके दुश्मन के जहाज को डुबोया था.
नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने आया था जहाज आपको बता दें कि ईरानी जहाज आईआरआईआईएस डेना विशाखापत्तनम में नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के बाद लौट रही थी. इसके अलावा एक अन्य ईरानी पोत, आईरिस लावन ने तकनीकी खराबी की सूचना देने के बाद भारत से आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति मांगी थी. ये अनुरोध 28 फरवरी को प्राप्त हुआ था और भारत ने इसे 1 मार्च को मंजूरी दे दी. ये पोत 4 मार्च को कोच्चि में डॉक हुआ, उसी दिन जब डेना जहाज डूबा था. तकनीकी समस्या के आकलन जारी रहने तक पोत कोच्चि में ही लंगर डाले खड़ा है.

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