
क्या होता है क्लाइमेट वीजा? डूबने के डर से ऑस्ट्रेलिया से जिसकी मांग कर रहे तुवालु के नागरिक
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जलवायु संकट ने पहले से ही यहां तबाही मचा रखी है और मीठे पानी के स्रोतों को प्रदूषित कर दिया है, जिससे रोजमर्रा के कामों में भी लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशांत महासागर के इस छोटे से देश ने डूबने के डर से अब अमेरिका से भी लिखित में आश्वासन मांगा है कि उसके नागरिकों की एंट्री को रोका नहीं जाएगा.
तुवालु देश की एक तिहाई से ज्यादा आबादी ने ऑस्ट्रेलिया में बसने के लिए 'क्लाइमेट वीज़ा' का आवेदन दिया है क्योंकि प्रशांत क्षेत्र का यह देश बढ़ते समुद्री स्तर के कारण अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहा है और डूबने की कगार पर है. वीजा की मांग ऑस्ट्रेलिया और तुवालु के बीच फालेपिली यूनियन संधि के लागू होने के बाद तेज हो गई है, जो क्लाइमेट मोबिलिटी के लिए एक नया मॉडल पेश करती है, क्योंकि यहां के लोग जलवायु संकट का सामना कर रहे हैं.
अमेरिका से भी मांगी मदद
तुवालु की आबादी करीब 11 हजार है और यह द्वीपीय देश नौ निचले एटोलों में फैला हुआ है. जलवायु परिवर्तन के लिए विश्व के सबसे संवेदनशील देशों में से एक तुवालु को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते समुद्र के कारण 2050 तक इसकी ज्यादातर जमीन जलमग्न हो सकती है, साथ ही कुछ द्वीप तो पहले ही लहरों के नीचे लुप्त हो जाएंगे.
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जलवायु संकट ने पहले से ही यहां तबाही मचा रखी है और मीठे पानी के स्रोतों को प्रदूषित कर दिया है, जिससे रोजमर्रा के कामों में भी लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशांत महासागर के इस छोटे से देश ने डूबने के डर से अब अमेरिका से भी लिखित में आश्वासन मांगा है कि उसके नागरिकों की एंट्री नहीं रोकी जाएगी, क्योंकि उसे गलती से वीजा बैन का सामना कर रहे 36 देशों की लिस्ट में डाल दिया गया है. अमेरिका ने पहले ही 12 देशों के नागरिकों की एंट्री पर बैन लगा है.
एक तिहाई लोगों ने किया अप्लाई

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