
क्या बिहार का सियासी गेम चेंज कर पाएंगे कांग्रेस में आए पप्पू यादव? पिछले चुनावों का देख लीजिए रिकॉर्ड
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पप्पू यादव कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. बतौर निर्दलीय पहला विधानसभा और लोकसभा चुनाव जीतने वाले पप्पू यादव बिहार में कांग्रेस का गेम कितना चेंज कर पाएंगे? पप्पू का पिछला चुनावी रिकॉर्ड क्या कहता है?
लोकसभा चुनाव के बीच बिहार में सियासी बयार बदल रही है. लालू यादव की खास रही आनंद मोहन की फैमिली अब नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में जा चुकी है. वहीं, 1990 के दशक में आनंद मोहन के प्रतिद्वंदी रहे राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अब लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व वाले बिहार के महागठबंधन में शामिल कांग्रेस के हो गए हैं. पप्पू यादव ने एक दिन पहले ही नई दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली और अपनी पार्टी जन अधिकार पार्टी का ग्रैंड ओल्ड पार्टी में विलय कर दिया.
पप्पू यादव के इस कदम को कांग्रेस गेमचेंजर समझ रही है. पहला ही चुनाव जीतकर विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए पप्पू यादव पांच बार सांसद भी रहे. एक बार के विधायक, पांच बार के सांसद... यह शब्द यह बताने के लिए काफी कहे जा रहे हैं जैसा कांग्रेस समझ रही है. लेकिन पप्पू यादव की पार्टी के पिछले चुनावों में प्रदर्शन, उनके चुनावी रिकॉर्ड को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. जिन पप्पू यादव को पार्टी में लाकर कांग्रेस के नेता गेमचेंजर समझ रहे हैं, उनका और उनकी पार्टी का पिछले कुछ चुनावों में रिकॉर्ड कैसा रहा है?
पप्पू का रिकॉर्ड 2004 तक जबरदस्त
दबंग छवि के पप्पू यादव 1990 के बिहार विधानसभा चुनाव में मधेपुरा जिले की सिंहेश्वर विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार उतरे और जीते. इसके एक साल बाद ही वह 1991 के लोकसभा चुनाव में भी बतौर निर्दलीय उम्मीदवार संसद पहुंचने में कामयाब रहे. शुरुआती दो चुनाव निर्दल जीतने के बाद पप्पू 1996 में समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर, 1999 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पूर्णिया से संसद पहुंचे. 2004 का चुनाव वह लालू यादव की पार्टी से लड़े और पूर्णिया से चौथी बार सांसद निर्वाचित हुए.
पप्पू की सियासी किस्मत ने 2009 में खाई पलटी
पूर्णिया लोकसभा सीट से दो बार निर्दलीय, एक बार बिना खास आधार वाली सपा और एक बार आरजेडी से संसद पहुंच चुके पप्पू की सियासी किस्मत ने 2009 में पलटी खाई. पूर्णिया लोकसभा सीट का पर्याय बन चुके पप्पू यादव को हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पटना हाईकोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी. कोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई तो आरजेडी ने भी उनसे किनारा कर लिया. पप्पू ने 2009 के चुनाव में पूर्णिया सीट से अपनी मां शांति प्रिया को निर्दलीय ही मैदान में उतार दिया लेकिन उन्हें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उदय सिंह से दो लाख वोट के अंतर से बड़ी हार का सामना करना पड़ा.

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