
क्या दिग्विजय सिंह बनाम शशि थरूर होगा कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव?
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कांग्रेस के अध्यक्ष पद चुनाव में अबतक दो उम्मीदवार सामने आए हैं. इसमें पहला नाम शशि थरूर का है. वहीं अब दूसरा नाम दिग्विजय सिंह का है. दोनों उम्मीदवार 30 सितंबर को नामांकन दाखिल करेंगे. इस रेस में कोई और भी होगा या नहीं इसपर अबतक सस्पेंस बना हुआ है.
कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव रोचक होता जा रहा है. दिग्विजय सिंह की चुनाव में एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. लेकिन अभी चुनाव को लेकर कई सवाल सामने हैं जिनके जवाब मिलने बाकी हैं. जैसे क्या अब चुनाव शशि थरूर बनाम दिग्विजय सिंह होगा? या किसी और उम्मीदवार की भी चुनाव में एंट्री होगी. दूसरा सवाल यह है कि क्या दिग्विजय को खड़ा करना सिर्फ अशोक गहलोत के लिए संदेश भर तो नहीं है?
जानकार मानते हैं कि दिग्विजय सिंह के कांग्रेस अध्यक्ष पद चुनाव में उतरने की वजह राजस्थान कांग्रेस में मचा घमासान भी हो सकता है. यह प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा हो सकता है. ताकि गहलोत पर दबाव बनाया जा सके कि वह सचिन पायलट से लड़ाई छोड़कर अध्यक्ष पद चुनाव की तरफ ध्यान दें.
दिग्विजय सिंह के चुनाव में उतरने के पीछे कई अन्य संदेश भी हैं. जैसे दिग्विजय चुनाव में उतरकर यह बताना चाहते हैं कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है और कोई भी चुनाव लड़ सकता है. खबरें ये भी हैं कि दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ेंगे लेकिन देशभर में अपना प्रचार करने नहीं जाएंगे. इसके उलट पर भारत जोड़ो यात्रा में अपने हिस्से की भूमिका अदा करेंगे.
गहलोत दिल्ली समन, क्या हो सकते हैं मायने?
राजस्थान संकट के बीच सीएम अशोक गहलोत को भी दिल्ली बुलाया गया है. यहां सोनिया गांधी से आज रात या कल सुबह गुरुवार को उनकी मुलाकात होनी है. राजस्थान में पार्टी के भीतर मचे बवाल से हाइकमान नाराज है. हाइकमान चाहता था कि गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ें और सीएम की गद्दी सचिन पायलट संभाल लें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. विधायकों के विद्रोह पर पार्टी ने एक्शन भी लिया है. गहलोत के तीन करीबियों को कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों ना हो.
कांग्रेस की अनुशासन कमेटी ने तीन विधायकों पर तो एक्शन लिया है लेकिन अशोक गहलोत को क्लीन चिट दी है. इसपर भी सवाल उठ रहे हैं. माना यह भी जा रहा है कि गहलोत अध्यक्ष पद की रेस में अभी भी बने हुए हैं. सूत्र बताते हैं कि गहलोत ने चुनाव का अंतिम फैसला सोनिया गांधी पर छोड़ दिया है. अब गहलोत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह गुरुवार सुबह तक साफ हो सकता है.

जिस समय दुनिया में भारत में चल रही AI समिट की वाहवाही हो रही थी. दुनिया के तमाम देशों के राष्ट्रप्रमुख भारत की क्षमताओं और लीडरशिप के कायल हो रहे थे. तब कांग्रेस की यूथ विंग का 'राजनीतिक विरोध'... कुंठा और हताशा की सारी सीमाओं को पार कर गया और फिर उन्होंने जो किया, उसे शर्मनाक, फूहड़ता, निर्लज्जता और 'राजनीतिक अधोपतन' ही कहा जा सकता है. कांग्रेस की यूथ विंग के कार्यकर्ताओं ने किसी पूर्व नियोजित योजना के तहत सुरक्षा घेरा तोड़कर AI समिट में प्रवेश किया.

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